अकबर-बीरबल (कहानी-10) अकबर का तोता

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Ekta Ranga
अकबर का तोता

अकबर को जानवरों और पक्षियों से बहुत प्रेम था। उसके महल में अलग अलग प्रकार के पक्षी रखे हुए थे। उसने अपने ही महल में एक अलग जगह हिरण जैसे जानवरों की व्यवस्था भी कर रखी थी। ऐसे ही एक दिन अकबर घूमने के लिहाज से आगरा के बाजार की ओर निकले हुए थे। घूमते घूमते वह एक ऐसी दुकान पर रुके जहां पर अनेकों प्रकार के पक्षी थे। उन अनेकों पक्षियों में से एक ऐसा भी पक्षी था जो बहुत प्यारा था। वह पक्षी तोता था। तोता बड़ा ही सुंदर और प्यारा था।

उस तोते की खास बात यह थी कि वह तोता ज्ञानवर्धक चीजें बोल रहा था। अकबर को वह तोता बहुत ही प्यारा और समझदार लगा। अकबर को वैसे भी पक्षियों से बहुत प्रेम था। उसने सोचा कि क्यों ना तोते को खरीद लिया जाए। आखिरकार अकबर ने तोते के मालिक को रुपए देकर तोता खरीद ही लिया। अब तोता भी अकबर के साथ-साथ महल पहुंच गया। महल पहुंचते ही तोते की खूब खातिरदारी की गई।

अकबर ने अपने सैनिकों से कहा कि तोते को महल के खास व्यक्ति की तरह रखा जाए। अकबर ने सैनिकों को यह भी आदेश दिया कि कोई भी इंसान तोते के मरने की खबर लेकर अकबर तक नहीं आना चाहिए। अगर भूलकर भी किसी ने तोते के मरने की खबर दी तो वह उस इंसान को फांसी दे देगा।

सभी सैनिकों ने अकबर का आदेश मान लिया। लेकिन सैनिकों को हर दिन यह डर भी सताता था कि अगर तोता मर गया तो वह अकबर को कैसे जाकर यह संदेश देंगे। अब हर दिन सैनिकों का समय तोते की सेवा में ही बीतता। कोई भी तोते को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने देते थे।

अकबर की आँखों का मानो जैसे वह तारा ही बन गया था। फिर एक दिन दुर्भाग्यवश वह तोता आखिरकार मर गया। जैसे ही उसके निधन का पता चला, सैनिकों में मानो जैसे दहशत का करंट दौड़ गया। अब सैनिकों को यह डर सताने लगा कि अगर उन में से कोई भी अगर तोते के मरने की खबर लेकर अकबर के पास पहुंचा तो उसको निश्चित ही फांसी की सजा मिलेगी।

अचानक एक दिन रात को वह तोता मर गया। तोते के मरते ही सभी को बहुत डर लगा कि अब यह खबर कैसे दी जाए। फिर सभी ने सोचा कि क्यों ना अकबर को इस बात के बारे में बोल दिया जाए। अब सभी सैनिक बीरबल के पास पहुंचे और उससे कहा कि उस तोते का निधन हो चुका है। अगर हम किसी ने जाकर यह खबर दी तो अनर्थ हो जाएगा। कृपया करके अब आप ही इस समस्या का निदान कीजिए। बीरबल ने कुछ देर तक समस्या का हल ढूँढा फिर जल्दी ही अकबर को यह खबर सुनाने निकल पड़ा।

जैसे ही बीरबल अकबर के पास पहुंचा अकबर ने कहा, “क्या हुआ बीरबल? इतनी रात को तुम क्या कहने आए हो?” बीरबल ने आत्मविश्वास के साथ कहा, “जी हुजूर बात ही ऐसी हो गई कि बताने आना ही पड़ा। वो बात यह है कि….” अकबर बोला, “बीरबल तुम पहेलियां मत बुझाओ। साफ साफ बताओ कि आखिर बात क्या है?” बीरबल बोला, “जी हुजूर, वह आपका प्यारा तोता है ना… दरअसल वह तोता ना तो कुछ बोलता है और ना ही कुछ खाता है। ना तो वह हँसता है और ना ही वह रोता है। ना जाने क्या हुआ है उस तोते को। क्या हो सकता है उस तोते को?” अकबर ने गुस्से भरे लहजे में कहा, “तुम साफ साफ यह क्यों नहीं बताते कि वह तोता मर गया है।

” बीरबल ने कहा, “जी हुजूर, आपने एकदम सही कहा कि वह तोता मर गया है। पर माफ करना शहंशाह यह बात मैंने नहीं आपने खुद अपनी जुबान से कही है। तो ऐसे में मैं सजा का हकदार नहीं हुआ।” अकबर को सारी बात समझ में आ गई। अकबर ने उसी वक्त अपना माथा पीट लिया।

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