अकबर-बीरबल (कहानी-5) सबसे बड़ा हथियार

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Ekta Ranga
सबसे बड़ा हथियार

अकबर और बीरबल के किस्से अलग अलग है। एक बार की बात है जब अकबर और बीरबल के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई कि दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आखिर कौन सा है। एक बार हुआ यूं कि अकबर ने बीरबल से पूछा कि इस दुनिया का सबसे बड़ा हथियार क्या हो सकता है?” तो इस बात पर बीरबल ने जवाब दिया कि, “इस दुनिया में अगर कोई सबसे बड़ा हथियार है भी तो वह है आत्मविश्वास।

एक आत्मविश्वास के होते हुए आप कोई भी बाधा पार कर सकते हो।” अकबर ने हंसते हुए कहा, “ऐसा कैसे हो सकता है? यह तो बहुत हास्यास्पद बात है। आत्मविश्वास को हम भला बड़ा हथियार कैसे मान सकते हैं?” बीरबल ने कहा, “बादशाह, यह सौ फीसदी सच है। मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं।” अकबर ने ऊपरी तौर पर बीरबल की बात मानी। अकबर अभी भी बीरबल के तथ्य से सहमत नहीं था।

अकबर ने मन ही मन सोचा कि वह बीरबल के दावे को झूठा साबित करके रहेगा। कुछ दिन बाद एक खबर फैल गई कि शहर का एक हाथी है वह एकदम से पागल हो चला है। वह हाथी हर किसी को देखकर बेवजह ही भड़क जाता था। महावत से लेकर हर कोई उस हाथी से परेशान था। यह खबर लेकर महावत अकबर के पास पहुंचा। अकबर ने उस महावत की बात गौर से सुनी और उसे कहा कि वह चिंता ना करे।

उस हाथी का कोई अच्छा समाधान निकल जाएगा। महावत ने अकबर को धन्यवाद दिया और घर की ओर जाने लगा। लेकिन अकबर ने उसे रोका और कहा, “मैं तुम्हारी समस्या को अच्छी तरह से समझ सकता हूं। पर तुम्हें मेरी एक शर्त माननी होगी।” महावत बोला, “जी हुजूर, मैं आपकी बात मानने को तैयार हूं।

अकबर ने कहा कि, “कल मैं एक इंसान को लेकर आऊंगा। तुम्हें उसे देखकर हाथी की जंजीरें खोलनी है। बस तुम्हारा काम इतना सा ही है।” महावत ने कहा, “पर जहांपना, अगर मैं हाथी की जंजीर खोलूंगा तो वह हाथी उस आदमी को कुचल देगा।” अकबर ने कहा, “महावत, मैंने तुम्हें जितना काम करने के लिए बोला है तुम उतना ही करो। मैं तुम्हें इस काम के लिए इनाम भी दूंगा।” अब बेचारा महावत क्या बोलता। उसने अकबर की हाँ में हाँ मिला दिया।

अगले दिन अकबर बीरबल के साथ महावत के घर पहुंचा। जैसे ही महावत ने बीरबल को देखा, महावत ने हाथी के पैरों में जकड़ी हुई बेड़ियों को खोल दिया। बेड़ी खुलते ही हाथी मचल उठा। पहले वह इधर-उधर भागा फिर बीरबल के समाने तेजी से भागा। बीरबल को कुछ भी समझ नहीं आया। उसे लगा कि हाथी उसकी ओर ही क्यों दौड़ा आ रहा है।

बीरबल को अंदर से घबराहट हो रही थी। अचानक ही बीरबल की नजर उस महावत के पालतू कुत्ते पर पड़ी। अब बीरबल ने ज्यादा कुछ ना सोचते हुए उस कुत्ते को हाथी की ओर उछाल दिया। जैसे ही कुत्ता हाथी की ओर आया तो वह तेज तेज चिल्लाने लगा। कुत्ते को ऐसे चिल्लाते हुए देख हाथी डर गया और पीछे हटकर एक जगह शांति से बैठ गया।

हाथी को ऐसे शांति से बैठा देख अकबर को बहुत अचंभा हुआ। उसने बीरबल से कहा कि वह हाथी जो इतना उत्पाती था वह कैसे इतना शांत हो गया। और वह भी एक कुत्ते को देखकर?” बीरबल ने कहा, “क्योंकि यह कुत्ते का आत्मविश्वास था जिसने हाथी को हरा दिया। और यह बीरबल का भी आत्मविश्वास था जिसने अकबर को हरा दिया। अब आपको समझ में आ गया होगा कि आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार होता है।” अकबर अब क्या बोलता। अब अकबर की बोलती बंद हो गई थी।

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