बाबा केदारनाथ के भक्त की कहानी

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यह उस समय की बात है जब केदारनाथ आने जाने के लिए रास्ते आज के ज़माने की तरह सुगम नहीं थे। उस समय केदार-बद्रीनाथ पैदल जाना पड़ता था। उस समय बहुत से ऐसे लोग भी थे जो कि वहां जाने के बाद कभी दोबारा लौटकर नहीं आते थे। ऐसे लोगों की भारी संख्या थी।

उसी ज़माने में भोलेनाथ का एक महान भक्त भी रहता था। उसने तय किया कि वह भी भोलेनाथ के द्वार पर जाएगा। इसलिए वह इस महान यात्रा पर निकल पड़ा। पूरे रास्ते भर वह केदारनाथ जाने के रास्ते के बारे में लोगों से पूछता रहा। हर एक पड़ाव पर लोग उसे केदारनाथ का रास्ता बताते रहे।

ऐसे करते करते कई दिनों की मशक्कत के बाद वह केदारनाथ धाम पहुंच ही गया। केदार धाम में बहुत ज्यादा ठंडक थी। जिस समय वह केदार धाम पहुंचा था। उस समय संयोगवश उसे कुछ ऐसा सुनने को मिला जिसके चलते वह बहुत उदास हो गया।

दरअसल उसे केदारनाथ मंदिर के पुजारी से यह पता चला कि वह भक्त थोड़ा गलत समय पर आया है। क्योंकि दिवाली का पूजन हो चुका है इसलिए अब मंदिर के कपाट भी बंद हो चुके है। यह सुनते ही कि मंदिर के कपाट बंद हो चुके हैं वश शिव भक्त जोर जोर से रोने लगा।

उसने मंदिर के पुजारी से गुहार की कि सिर्फ थोड़े देर के लिए ही भगवान के मंदिर का दरवाजा खोल दीजिए। उस शिव भक्त की इस बात पर पुजारी को हंसी आ गई। उस पुजारी ने कहा कि ऐसा तो बिल्कुल भी संभव नहीं हो सकता है। भक्त ने एक बार और गुहार लगाई पर उस पुजारी पर तो कोई असर नहीं पड़ा।

पुजारी ने भक्त से कहा कि अब तुम 6 महीने के बाद ही आना। अब तो तुम्हें छह महीने बाद ही भगवान के दर्शन हो पाएंगे। छह महीने कपाट बंद रहते हैं। और छह महीने कपाट खुले रहते हैं। ऐसा सुनते ही वह शिव भक्त बिलख बिलख कर रोने लगा। उसने फिर से दर्शन पाने की इच्छा के चलते सभी से गुहार लगाई। पर निराशा ही हाथ लगी। उसे लगा कि वह कितनी मेहनत से बाबा के दरबार आया है। और अब उसे निराश होकर लौटना पड़ेगा।

वह इसी सोच विचार में डूबा हुआ वहां घंटों तक बैठा रहा। उसे पता ही नहीं चला कि कब सुबह से शाम हो गई। लगातार रोने से उसका हाल बहुत बुरा हो चुका था। कि तभी अचानक उसने किसी के कदमों की आहट सुनी। उसने नज़रे उठाकर ऊपर देखा तो पाया कि एक सौम्य चेहरे वाला साधु उसके सामने खड़ा था।

उस साधु ने उस भक्त के पास आकर पूछा कि, “बेटा, तुम रो क्यों रहे है? तुम्हें क्या परेशानी है?” इस बात पर भक्त ने अपने आंसू पोंछकर साधु बाबा को अपनी सारी आपबीती सुना दी। साधु बाबा बोले, “बेटा, तुम सच्चे मन से भगवान के दर्शन करने आए हो।

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तुम्हारे मन में कोई भी तरह का छल कपट नहीं है। मैं तुम्हें आश्वासन देता हूं कि तुम्हें भोलेनाथ के दर्शन जरूर होंगे। तुम ईश्वर पर भरोसा रखो।” साधु बाबा के मुख से ऐसे सकारात्मक शब्द सुनते ही वह एकदम से प्रसन्न हो उठा। खुशी के मारे उसको कब नींद आ गई, उसे पता ही नहीं चला।

जब उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि सुबह हो चुकी थी। पता नहीं आज वातावरण में खूब ठंडक क्यों नहीं थी। आज केदार धाम का वातावरण तो अनुकूल था। उस शिव भक्त ने देखा कि मंदिर के कपाट खुलने जा रहे थे।

वह हैरान रह गया कि यह सब कैसे हो गया। कि तभी मंदिर का पुजारी उसके पास आया और बोला, “तुम तो सच में भोलेनाथ के परम भक्त हो। कहना पड़ेगा कि तुम छह महीने बाद फिर से दर्शन करने आ गए। इस बात पर भक्त हैरानी में पड़ गया। उसने कहा, “मैं तो कल ही आया था।

फिर आप ऐसा क्यों कह रहे हैं कि मैं छह महीने बाद आया। और रही बात दर्शन की तो कल एक भले साधु बाबा ने आशीर्वाद दिया था कि मुझे भगवान भोलेनाथ के दर्शन जरूर होंगे।” जैसे ही वहां खड़े लोग और पुजारी ने यह बात सुनी, वह सभी उस शिव भक्त के चरणों में गिर पड़े। मतलब उस शिव भक्त को साक्षात भगवान शिव के दर्शन हुए थे। भगवान शिव की कृपा से ही काल-खंड छोटा हो गया। और मंदिर के कपाट खुल गए।

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