गुलाब और कमल की कहानी

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एक गाँव में बहुत बड़ा तालाब था। उस तालाब से सभी पानी पीने आते थे। उसी तालाब के पास एक सुंदर सा गुलाब का पौधा था। वह गुलाब बहुत ज्यादा सुंदर था। उस सुंदर गुलाब को देखकर सभी लोगों का दिल खुश हो जाता था। तालाब में एक किनारे पर कीचड़ पैदा हो गया था। और कुछ दिन बाद उस कीचड़ में सुंदर कमल का फूल उग आया। उस गुलाब के पौधे से कीचड़ की बदबू सहन करना मुश्किल होता था।

वह आए दिन कमल के फूल को कोसते हुए कहता कि, “तुम कीचड़ में क्यों उगे? तुम्हें वैसे भी कोई पसंद नहीं करने वाला है। कीचड़ में रहने से तुम भी वैसे ही बन गए हो इस बात से गुलाब का घमंड साफ़ झलक रहा था। गुलाब को अपनी सुंदरता पर बहुत ज्यादा अभिमान था। पर कमल गुलाब की बातों से बिल्कुल भी आहत नहीं हुआ। कमल का फूल विनम्रता को ज्यादा तरजीह देता था। वह बिना शर्म किए ही डटकर खड़ा रहा।

एक दिन बहुत तेज गर्मी पड़ी। चारों तरफ सब कुछ सूखने लगा था। गुलाब का वह फूल जिसे अपने पर इतना नाज था अब वह भी मुरझाने लगा था। पर कमल का फूल इतना सब कुछ होने पर भी एकदम स्थिर खड़ा रहा। गुलाब को अब और ज्यादा गर्मी सहन नहीं हो पा रही थी। उसे जोरों की प्यास भी लग रही थी। उसे इतना तकलीफ में देखकर कमल के फूल को उसपर दया आ गई। उसने गुलाब को कहा कि वह उसकी पत्तियों को खाकर अपनी प्यास बुझा ले।

गुलाब ने ऐसा ही किया। अब गुलाब को तरोताजा महसूस हो रहा था। उसने कमल को धन्यवाद दिया। गुलाब को अपने बुरे व्यवहार पर बहुत शर्म आ रही थी। गुलाब ने कमल से माफी मांगी और हमेशा के लिए उसका अच्छा दोस्त बन गया। अब गुलाब को विनम्रता की कीमत समझ आ गई थी। थोड़ी ही देर बाद में पूरे गाँव में जमकर बारिश हुई और इसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया।

इस कहानी से सीख- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन में हमेशा विनम्र बने रहना चाहिए। जीवन में हमेशा विनम्र इंसान की ही जीत होती है।

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