100+हिंदी कहानियां (Hindi Stories) | Hindi Story

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Ekta Ranga

हिंदी कहानियां (Stories in Hindi) – जब एक इंसान लेखक होता है तो उसके दिमाग में सौ कहानियां घूमती हैं। वह कहानियां कोई भी हो सकती हैं। वह आपके जीवन से भी जुड़ी हो सकती है तो कोई एकदम मनगढ़ंत भी हो सकती हैं। कहानियां हम सब को पढ़नी अच्छी लगती है। किसी को भूत की कहानियां पसंद होती है तो किसी को प्रेरणादायक कहानियां। सभी कहानियों का अपना अपना महत्व होता है। कहानियां सभी को बड़ा ही लुभाती है। कहानी को हम आसान शब्दों में एक लेखक की रचना भी कहते हैं। कोई कहानी हमें हँसाती हैं तो कोई कहानी हमें रोने को मजबूर कर देती हैं।

हिंदी कहानियां (Hindi Story)

बचपन से ही मेरा बहुत बड़ा शौक था किताबें पढ़ने का। और यही शौक आज भी बना हुआ है। बस मुझे एक किताब चाहिए पढ़ने के लिए। फिर तो उसके बाद मैं उसी किताब की कहानियों में डूब जाती हूँ। उस किताब के किरदारों से मेरा जैसे कोई नाता जुड़ जाता है। मैं उन किरदारों में अपने आप को ढूंढ़ने लगती हूं। यह केवल मेरे साथ ही नहीं होता बल्कि सभी किताब प्रेमियों के साथ होता है। कहानी के पात्रों से लगाव होना आम बात है।

कहानियां हमें उत्सुक बनाए रखती है कि कहानी में अगला मोड़ कब आएगा। लिखने वाले को भी उतना ही मज़ा आता जितना एक पाठक को पढ़ने में आता है। लेखक को भी अपने किरदार से प्यार हो जाता है। कहानियां तो शायद सदियों से लिखी जा रही है। पर कथा साहित्य से कहानियों को बहुत बल मिला। तो आज का हमारा टॉपिक हिंदी कहानियों पर आधारित है। अब कुछ दिन के लिए हम कहानियों के सफर पर चलेंगे।

कहानी का अर्थ क्या होता है?

कहानी शब्द से हम सब परिचित हैं। बचपन से ही हम कहानियां पढ़ने और सुनने लग जाते हैं। तो चलिए हम जानते हैं कि आखिर कहानी होती क्या है? दरअसल कहानी कथा साहित्य की एक ऐसी कला है जिसमें एक लेखक अपने दिमाग में उपजे विचारों को कागज के पन्नों पर उतारता है। कागज के पन्ने पर उतरते ही विचार किरदार में तब्दील हो जाते हैं। कहानी शब्द संस्कृत कथ् से उठाया गया है।

जिसका मतलब होता है कहना। एक लेखक अपने विचारों को कहानी के माध्यम से व्यक्त करता है। कहानी एक लेखक के दिमाग की शानदार उत्पत्ति होती है। कहानी पढ़ने के बाद पाठक को शानदार अनुभूति होती है। वह कहानी के मुख्य पात्र को अपने आप से जोड़कर देखने लग जाता है। गद्य साहित्य के तीन प्रकार होते हैं- नाटक, उपन्यास और कहानी। गद्य साहित्य में कहानी को हमेशा से ही सबसे ज्यादा पसंद किया जाता रहा है। नाटक और उपन्यास के मुकाबले कहानी छोटी तो होती है पर अंत में वह एक महत्वपूर्ण संदेश भी छोड़ जाती है। लेखक में कहानी को लिखने की शानदार शैली होती है।

कहानी का इतिहास

कहानी का इतिहास बहुत पुराना रहा है। अगर हम अपने इतिहास में जाकर देखें तो हमें ढेरों कहानियां और किस्से सुनने को मिलेंगे। बहुत पुराने समय में लोग कहानियां लिखते नहीं थे बल्कि एक दूसरे को सुनाया करते थे। ऐसे में कहानी एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंच जाती थी और यह सिलसिला चलता रहता था। इस चीज का सबसे अच्छा उदाहरण है रामायण, महाभारत और गौतम बुद्ध की कथाएं।

इतिहास में कई राजा – महाराजाओं के शौर्य के बारे में भी कहानियां लिखी गई है। इन सभी कहानियों से हमें कुछ ना कुछ शिक्षा ही प्राप्त होती है। हमारे भारतीय ग्रंथ ‘ऋग्वेद’ में भी शिक्षाप्रद कहानियों का भंडार है। इसके अलावा पंचतंत्र की कहानियां भी बड़ी ही शिक्षाप्रद होती है। पर क्या आपको पता है कि आधुनिक कहानियों को लिखने का सिलसिला कब शुरू हुआ? आधुनिक कहानियां २० वीं सदी से ही प्रसिद्ध होने लगी थी। लोग किशोरी लाल गोस्वामी की ‘इन्दुमती’ कहानी को सबसे पहली आधुनिक कहानी मानते हैं। यह कहानी सन 1900 में लिखी गई थी। इसके बाद तो कहानियों की जैसे कोई बाढ़ ही आ गई थी। उस समय हर दिन एक नया लेखक तैयार हो रहा था।

कहानी की विशेषताएं

कहानी की विशेषताएं चार प्रकार की होती है-

1) कथानक – कथानक को हम अंग्रेज़ी में plot कहते हैं। यह किसी भी कहानी का एक अहम और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। एक लेखक के दिमाग में सबसे पहले कथानक ही आता है। लेखक को यह ज्ञात हो कि कथानक ही किसी कहानी को प्रसिद्ध होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब एक कहानी का कथानक मजबूत होता है तो यह सौ फीसदी गारंटी देता है कि कहानी लोगों के दिल को छू जाएगी। मजबूत और आकर्षक कथानक होने से कहानी की सक्सेस रेट बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। लेखक को यह भी मालूम हो कि उसको कहां से कहानी शुरू करनी है और कहां पर खत्म करनी है।

2) शीर्षक – जब भी एक लेखक कहानी लिखता है तो वह उसके शीर्षक के बारे में कई बार सोचता है। काफी सोच-विचार के बाद एक शीर्षक को वह लेखक मंजूरी देता है। पाठक को शीर्षक ऐसा लगना चाहिए जैसे कि उसका कहानी से कोई रिश्ता हो। शीर्षक से पाठक को अपनेपन का एहसास होना चाहिए।

3) भाषा शैली – लेखक की लिखने की शैली बहुत ही शानदार होनी चाहिए। भाषा ही एक कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। अगर कहानी की भाषा को सरल और सुंदर रखा जाए तो पाठक उसे बिना कोई परेशानी के ही समझ लेते हैं।

4) वातावरण – कोई भी कहानी लिखो तो यह भी बहुत जरूरी है कि उस कहानी का वातावरण कैसा जा रहा है। जैसे अगर कहानी हिमाचल की वादियों से ही प्रारंभ होती है तो लेखक को कुछ ऐसा लिखना चाहिए कि पाठक को लगे कि वह हिमाचल प्रदेश की वादियों में ही है।

महान लेखकों के कहानी पर विचार

एडगर एलिन पो के कहानी पर विचार

“कहानी वह छोटी आख्यानात्मक रचना है, जिसे एक बैठक में पढ़ा जा सके, जो पाठक पर एक समन्वित प्रभाव उत्पन्न करने के लिये लिखी गई हो, जिसमें उस प्रभाव को उत्पन्न करने में सहायक तत्वों के अतिरिक्‍त और कुछ न हो और जो अपने आप में पूर्ण हो।”

मुंशी प्रेमचंद के कहानी पर विचार

“कहानी वह ध्रुपद की तान है, जिसमें गायक महफिल शुरू होते ही अपनी संपूर्ण प्रतिभा दिखा देता है, एक क्षण में चित्त को इतने माधुर्य से परिपूर्ण कर देता है, जितना रात भर गाना सुनने से भी नहीं हो सकता।”

बाबू गुलाबराय के कहानी पर विचार

“छोटी कहानी एक स्वतः पूर्ण रचना है जिसमें एक तथ्य या प्रभाव को अग्रसर करने वाली व्यक्ति- केंद्रित घटना या घटनाओं के आवश्यक, परन्तु कुछ-कुछ अप्रत्ययाशित ढंग से उत्थान – पतन और मोड़ के साथ पात्रों के चरित्र पर प्रकाश डालने वाला कौतूहलपूर्ण वर्णन हो।”

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FAQs

Q1. कहानी का अर्थ क्या होता है?

A1. कहानी शब्द संस्कृत कथ् से उठाया गया है। जिसका मतलब होता है कहना। एक लेखक अपने विचारों को कहानी के माध्यम से व्यक्त करता है। कहानी एक लेखक के दिमाग की शानदार उत्पत्ति होती है। कहानी पढ़ने के बाद पाठक को शानदार अनुभूति होती है।

Q2. कहानियों के प्रकार बताइए?

A2. धार्मिक कहानियाँ, ऐतिहासिक कहानियाँ, सामाजिक कहानियाँ, यर्थाथवादी कहानियाँ, आदर्शवादी कहानियाँ, आदर्षोन्मुख यर्थाथवादी कहानियाँ, घटना प्रधान कहानियाँ, चरित्र प्रधान कहानियाँ और समस्यात्मक कहानियाँ।

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