पंचतंत्र की कहानियां (Panchtantra Stories in hindi) – Panchtantra Ki Kahaniya

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Ekta Ranga

हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपके लिए बेहतरीन पंचतंत्र की कहानियां लेकर आए हैं। यह कहानियां बहुत ही रोचक हैं। हम बचपन से ही पंचतंत्र की कहानियां पढ़ते हुए आ रहे हैं। इन कहानियों से हमें एक नई शिक्षा या नई सीख मिलती है। पंचतंत्र की कहानियां में जितनी शोक से बच्चे आनंद लेते हैं, उतनी ही बड़े भी आनंद लेते हैं। पंचतंत्र की कहानियां हमें स्कूल की हिंदी की पुस्तक में भी पढ़ने को मिल जाती है। पंचतंत्र नीति, कथा और कहानियों का संग्रह है।

पंचतंत्र की कहानियां (Panchtantra Stories in hindi)

स्कूल के दिनों में जब भी लाइब्रेरी का पीरियड लगता था तो उस समय मन एकदम से खुश हो जाता था। मन में एक अलग प्रकार की उमंग होती थी कि आज कौन सी नई किताब पढ़ने को मिलेगी। मेरा मन तो हमेशा पंचतंत्र की कहानियों और चंदामामा जैसी किताबों में ही डूबा रहता था। इन किताबों को लेकर दीवानगी थी कि मैं क्लासरूम से निकलकर भागते हुए लाइब्रेरी पहुंच जाती थी। बाकी क्लास के बच्चे मेरे से दो मिनट बाद में आते थे। उन बच्चों को पंचतंत्र की कहानियों में कोई दिलचस्पी नहीं होती थी। जैसे ही मुझे किताब मिलती मैं पंचतंत्र की कहानियों में डूब जाती थी। फिर पढ़ते पढ़ते सोचती थी कि इतनी शानदार कहानियां लिखने वाला इंसान भला कौन होगा। लेकिन चंद पल बाद ही यह विचार मेरे दिमाग से निकल जाता और मैं कहानियों में फिर से डूब जाती।

पंचतंत्र की कहानियां क्या है?

हम बचपन से पंचतंत्र की कहानियां पढ़ते आए हैं। लेकिन क्या कभी इसके बारे में कभी गहराई से सोचा है कि आखिर पंचतंत्र की कहानियां क्या होती है? पंचतंत्र को हमारे देश की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध कथा ग्रंथ मानी जाती है। यही नहीं पंचतंत्र की कहानियां विदेश में भी बहुत चाव के साथ पढ़ी जाती है। अब आप सभी के दिमाग में यह प्रश्न आया होगा कि आखिर पंचतंत्र की कहानियों के लेखक कौन है? और पंचतंत्र नाम कहां से आया है? तो हम आपको यह जानकारी देना चाहते हैं कि पंचतंत्र की कहानियों को लिखने का श्रेय पंडित विष्णु शर्मा को जाता है। पंडित विष्णु शर्मा बहुत बड़े विद्वान थे। वह ब्राह्मण जाति से संबंध रखते थे। उन्होंने पंचतंत्र की अनेकों कहानियां लिखी। अब जानते हैं कि पंचतंत्र किसे कहते हैं। पंचतंत्र का अर्थ है किसी चीज के पांच भाग। क्योंकि पंचतंत्र की कहानियां पांच भागों में बांटी गई थी इसलिए इसका नाम पंचतंत्र रखा गया। पंचतंत्र की कहानियों को जानवरों के माध्यम से समझाया गया है। पंचतंत्र की कहानियों को मौलिक रूप से संस्कृत में लिखा गया था। बाद में यह कहानियां दुनियाभर की अनेकों भाषाओं में भी प्रकाशित हुई।

पंचतंत्र की कहानियां पढ़ें

तोता, मैना और चील की कहानी
दो बहनों की कहानी
एकता में बल है, कहानी
मूर्ख सेठ और भिखारी की कहानी
गुलाब और कमल की कहानी

पंचतंत्र के पांच भाग कौन से है?

1) मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव)

2) मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति (मित्र प्राप्ति या उसके लाभ)

3) संधि-विग्रह/काकोलूकियम (कौवे या उल्लुओं की कथा)

4) लब्ध प्रणाश (मृत्यु या विनाश के आने पर; यदि जान पर आ बने तो क्या?)

5) अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें; हड़बड़ी में क़दम न उठाएं)

पंडित विष्णु शर्मा के बारे में

पंडित विष्णु शर्मा अपने समय के बहुत बड़े विद्वान थे। इनको पंचतंत्र जैसे मशहूर ग्रंथ को लिखने का श्रेय जाता है। लोगों का मानना है कि वह दक्षिण भारत के महिलारोप्य शहर से ताल्लुक रखते थे। इन कहानियों को जब लिखा गया था तब विष्णु शर्मा की उम्र 40 साल की थी। माना जाता है कि पंचतंत्र की कहानियों का विचार उनके दिमाग में तब आया जब उनके उनके ऊपर पढ़ाने का कार्यभार सौंपा गया था। कहते हैं कि विष्णु शर्मा को एक बार किसी राजा ने अपने 3 पुत्रों को पढ़ाने के लिए अपने महल में रखा था। राजा के तीनों बेटे ही बड़े ही मुर्ख थे। उनको विष्णु शर्मा हर तरह की शैली से ज्ञान देने की कोशिश करते। लेकिन उन तीनों के दिमाग में ज्ञान का एक अक्षर भी नहीं जा पाता था। फिर आखिरकार विष्णु शर्मा उनको जंतु कथाएं सुनाकर ज्ञान देने लगे। तब जाकर उन तीनों को ज्ञान आना शुरू हुआ। बस उसी दिन से पंचतंत्र की कहानियों का जन्म हुआ। बहुत से इतिहासकारों का यह भी मानना है कि पंचतंत्र की कहानियां चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में लिखी गई थी। कई लोग चाणक्य को ही विष्णु शर्मा मानते हैं।

FAQs

Q1. पंचतंत्र से आप क्या समझते हैं?

A1. पंचतंत्र नीति शास्त्र का ग्रंथ है। इस ग्रंथ में अनेकों कहानियां है जो संस्कृत भाषा में लिखी गई थी। यह कहानियां जीवन में आपको प्रेरणा देती है। यह आपको जीवन में आगे बढ़ने का साहस देती है।

Q2. यूरोप में इस पुस्तक को कौन से नाम से जाना जाता है?

A2. यूरोप में पंचतंत्र की पुस्तक को द फ़ेबल्स ऑफ़ बिदपाई के नाम से जाना जाता है।

Q3. पंचतंत्र के पांच सिद्धांत बताइए?

A3. मित्र भेद” (दोस्तों की हानि), “मित्र लाभ” (मित्र प्राप्त करना), “सुहरुद भेद” (दोस्तों के बीच कलह पैदा करना), “विग्रह” (अलगाव,” और “संधि”) यह सभी पंचतंत्र के पांच सिद्धांत है।

Q4. पंचतंत्र की कहानियां किसने लिखी थी?

A4. पंचतंत्र की कहानियां पंडित विष्णु शर्मा ने लिखी थी। वह एक विद्वान ब्राह्मण पंडित थे।

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