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Class 12 Geography Book-2 Ch-1 “जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन” Notes In Hindi

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Mamta Kumari
Published on

इस लेख में छात्रों को एनसीईआरटी 12वीं कक्षा की भूगोल की पुस्तक-2 यानी भारत लोग और अर्थव्यवस्था के अध्याय- 1 “जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन” के नोट्स दिए गए हैं। विद्यार्थी इन नोट्स के आधार पर अपनी परीक्षा की तैयारी को सुदृढ़ रूप प्रदान कर सकेंगे। छात्रों के लिए नोट्स बनाना सरल काम नहीं है, इसलिए विद्यार्थियों का काम थोड़ा सरल करने के लिए हमने इस अध्याय के क्रमानुसार नोट्स तैयार कर दिए हैं। छात्र अध्याय- 1 भूगोल के नोट्स यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

Class 12 Geography Book-2 Chapter-1 Notes In Hindi

आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दो ही तरह से ये नोट्स फ्री में पढ़ सकते हैं। ऑनलाइन पढ़ने के लिए इस पेज पर बने रहें और ऑफलाइन पढ़ने के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें। एक लिंक पर क्लिक कर आसानी से नोट्स की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए ये नोट्स बेहद लाभकारी हैं। छात्र अब कम समय में अधिक तैयारी कर परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। जैसे ही आप नीचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करेंगे, यह अध्याय पीडीएफ के तौर पर भी डाउनलोड हो जाएगा।

अध्याय- 1 “जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन“

बोर्डसीबीएसई (CBSE)
पुस्तक स्रोतएनसीईआरटी (NCERT)
कक्षाबारहवीं (12वीं)
विषयभूगोल
पाठ्यपुस्तकभारत लोग और अर्थव्यवस्था
अध्याय नंबरएक (1)
अध्याय का नाम“जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन”
केटेगरीनोट्स
भाषाहिंदी
माध्यम व प्रारूपऑनलाइन (लेख)
ऑफलाइन (पीडीएफ)
bhar
कक्षा- 12वीं
विषय- भूगोल
पुस्तक- भारत लोग और अर्थव्यवस्था
अध्याय- 1 “जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन”

जनसंख्या वितरण और उसको प्रभावित करने वाले मुख्य कारक

  • भारत में जनसंख्या के आकड़ों को प्रत्येक दस वर्ष बाद होने वाली जनगणना द्वारा एकत्रित किया जाता है।
  • भारत में पहली जनगणना 1872 ई. में की गई थी लेकिन पहली संपूर्ण जनगणना 1881 ई. में पूरी हुई थी।
  • जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर आता है।
  • भारत देश में लोगों की संख्या उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और आस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या से अधिक है।
  • देश में अधिक जनसंख्या और सीमित संसाधनों के कारण सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • भारतीय प्रदेशों में जनसंख्या का वितरण असमान है।
  • जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
    • भौतिक कारक: इन कारकों में भू-विन्यास, जल की उपलब्धता और जलवायु को शामिल किया गया है जोकि जनसंख्या वितरण के रूप को निर्धारित करते हैं। उदाहरण के लिए तटीय मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक निवास करती है जबकि प्रयद्वीपीय क्षेत्रों व हिमालय के राज्यों में कम जनसंख्या निवास करती है। आज जिन राज्यों में कृषि के लिए अच्छी व तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध है वहाँ जनसंख्या घनत्व उच्च हो गया है।
    • आर्थिक कारक: ये कारक जनसंख्या वितरण को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पुणे, चेन्नई और जयपुर के नगरीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में औद्योगिक कारकों ने ग्रामीण व नगरीय लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया है।
    • ऐतिहासिक एवं सामाजिक कारक: प्रदेशों में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ जमीन, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण इनमें कमी आ गई है, फिर भी प्राचीन इतिहास और परिवहन साधनों की सुविधा के कारण यहाँ जनसंख्या का घनत्व उच्च पाया जाता है।
    • कृषि विकास, औद्योगीकरण और नगरीकरण कारक: सभी कारकों में कृषि विकास, औद्योगीकरण और नगरीकरण कारक सबसे महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं। ये तीनों कारक जिन क्षेत्रों या प्रदेशों में पाए जाते हैं, वहाँ जनसंख्या का उच्च सांद्रण पाया जाता है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, पुणे, चेन्नई एवं जयपुर इन कारकों से संपन्न प्रदेश माने जाते हैं।

जनसंख्या घनत्व और जनसंख्या घनत्व का वितरण

  • जनसंख्या घनत्व को प्रति इकाई क्षेत्र में व्यक्तियों की संख्या द्वारा दर्शाया जाता है जिससे जनसंख्या के स्थानिक वितरण को आसानी से समझा जा सके।
  • वर्ष 2011 में भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. था वहीं वर्ष 1951 में जनसंख्या घनत्व 117 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. था।
  • इस प्रकार पिछले 50 वर्षों में जनसंख्या घनत्व में 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. से भी अधिक वृद्धि हुई है।
  • भारत में जनसंख्या घनत्व में असमानता पाई जाने के आधार पर जनसंख्या घनत्व को तीन भागों में बाँटा गया है-
    • उच्च जनसंख्या घनत्व: इस श्रेणी में मुख्य रूप से मैदानी, नगरीय और तटीय राज्यों को शामिल किया जाता है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 11297, बिहार में 1102, पश्चिम बंगाल में 1029, केरल में 859, उत्तर प्रदेश में 829 और तमिलनाडु में 555 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. जनसंख्या घनत्व था। इन राज्यों को उच्च जनसंख्या घनत्व वाला राज्य कहा जाता है।
    • मध्यम जनसंख्या घनत्व: जिन राज्यों में उच्च जनसंख्या घनत्व से कम और निम्न जनसंख्या घनत्व से अधिक जनसंख्या घनत्व पाया जाता है उन्हें मध्यम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य कहा जाता है। असम, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड एवं ओडिशा जैसे राज्यों में मध्यम जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।
    • निम्न जनसंख्या घनत्व: भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में निम्न जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।

जनसंख्या की वृद्धि

  • किसी निश्चित क्षेत्र में दो समय बिंदुओं के बीच जनसंख्या में हुए परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं।
  • जनसंख्या वृद्धि दर को प्रतिशत में अभिव्यक्त किया जाता है।
  • जनसंख्या वृद्धि दर के महत्वपूर्ण दो घटक हैं, जिनका वर्णन निम्न है-
    • प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि: इस जनसंख्या वृद्धि का निर्धारण अशोधित जन्म दर और अशोधित मृत्यु दर से किया जाता है।
    • अभिप्रेरित जनसंख्या वृद्धि: अभिप्रेरित जनसंख्या वृद्धि को किसी विशेष क्षेत्र के लोगों की अंतर्वर्ती और बहिर्वर्ती संचलन के आकलन द्वारा प्राप्त की जा सकती है।

जनसंख्या वृद्धि में क्षेत्रीय भिन्नताएँ

  • भारत में वर्ष 1991 से 2001 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर औसत वृद्धि दर को दर्शाता है, जिनका वितरण सभी प्रदेशों में असमान है।
  • जिन राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर सबसे कम है वे राज्य हैं- केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गोवा, पुदुचेरी आदि।
  • उपरोक्त क्षेत्रों में 1991 से 2001 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर 20% से अधिक नहीं हुई।
  • केरल की वृद्धि दर उपरोक्त राज्यों के अलावा पूरे देश में भी निम्नतम वृद्धि दर के रूप में दर्ज की गई। केरल की वृद्धि दर 9.4% थी।
  • उत्तरी-पश्चिमी, उत्तरी और उत्तर-मध्य भागों में पश्चिम से पूर्व स्थित राज्यों को उच्च जनसंख्या वाले क्षेत्रों के रूप में शामिल किया गया।
  • वर्ष 2001-2011 के दौरान जनसंख्या वृद्धि में आंध्र प्रदेश में सबसे कम (3.5%) और महाराष्ट्र में सर्वाधिक (6.7%) गिरावट दर्ज की गई थी।
  • उस दौरान (2001-2011) तमिलनाडु (3.9%) और पुदुचेरी (7.1%) में पिछले दशक की तुलना में कुछ वृद्धि दर्ज की गई।

जनसंख्या संघटन तथा इसकी प्रमुख विशेषताएँ

  • जनसंख्या संघटन को सामाजिक और आर्थिक विशेषताओं का महत्वपूर्ण सूचक माना जाता है।
  • यह जनसंख्या भूगोल के अंतर्गत अध्ययन का एक सुस्पष्ट क्षेत्र है जिसमें आयु, लिंग, भाषा, धर्म, वैवाहिक स्थिति, जातियाँ, जनजातियाँ, साक्षरता, शिक्षा तथा व्यावसायिक संरचना जैसी मुख्य सामाजिक आर्थिक विशेषताएँ सम्मिलित हैं।
  • जनसंख्या संघटन की मुख्य दो महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन निम्नलिखित है-
    • भाषाई संघटन: भारत विभिन्नताओं का देश है जिंसमें अनेक भाषायी वर्ग पाए जाते हैं। भाषायी विविधता राज्यों को एक नई पहचान देता है। वर्ष 1903-1928 में ग्रियर्सन द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार देश में लगभग 179 भाषाएँ और 544 बोलियाँ बोली जाती थीं। सभी भाषाओं में से 22 भाषाएँ संविधान में अनुसूचित हैं जबकि बाकी की गैर-अनुसूचित हैं। अनुसूचित भाषाओं में से हिंदी बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है जबकि संस्कृत और मणिपुरी बोलने वालों की संख्या कम है।
    • धार्मिक संघटन: भारत में सामाजिक और आर्थिक जीवन सबसे ज्यादा धर्म से प्रभावित होता है क्योंकि धर्म परिवार और समुदायिक जीवन के लगभग सभी पक्षों में प्रत्यक्ष रूप से व्याप्त होता है। जिस तरह से सभी राज्यों में भाषायी विविधता पाई जाती है उसी तरह लगभग सभी राज्यों में धार्मिक असमानता पाई जाती है, जिसका वर्णन निम्न प्रकार है-
      • भारत-बांग्लादेश सीमा एवं भारत-पाक सीमा से संलग्न जिलों, जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व के पर्वतीय राज्यों, दक्कन पठार के साथ-साथ गंगा के मैदान को छोड़कर लगभग सभी राज्यों में हिंदू धर्म के लोग कुल जनसंख्या का 70% से 90% हैं।
      • मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल और उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में अधिक पाई जाती है।
      • वहीं ईसाई समुदाय के लोगों की अधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती है। गोवा, केरल, मेघालय, मिजोरम, छोटानागपुर और नागालैंड, मणिपुर की पहाड़ियों में ईसाई समुदाय संकेंद्रित है।
      • पंजाब, हरियाणा एवं दिल्ली में सिख समुदाय का संकेंद्रण बाकी राज्यों की तुलना में अधिक पाया जाता है।
      • जैन और बौद्ध धर्म भारत के कुछ ही देशों में संकेंद्रित हैं, जिसमें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्य शामिल हैं।
      • कुछ अन्य जातियाँ और जनजातियाँ भी धार्मिक संघटन का हिस्सा हैं।

श्रमजीवी जनसंख्या का संघटन

  • आर्थिक स्तर पर भारत की जनसंख्या को तीन वर्गों में बाँटा गया है, जोकि निम्न प्रकार से है-
    • मुख्य श्रमिक: जो व्यक्ति एक साल में कम से कम 183 दिन या छः महीने तक रोजगार प्राप्त करने के बाद कार्य करता है उसे मुख्य श्रमिक कहा जाता है।
    • सीमांत श्रमिक: जो व्यक्ति रोजगार प्राप्त करने के बाद वर्ष में 183 दिन से कम या छः महीने से कम दिनों के लिए कार्य करता है उसे सीमांत श्रमिक कहा जाता है।
    • अश्रमिक: जो व्यक्ति पूरे साल में कोई भी रोजगार प्राप्त नहीं करते हैं उन्हें अश्रमिक कहा जाता है।
  • वर्ष 2011 के अनुसार भारत में मुख्य व सीमांत श्रमिकों का अनुपात 39.8% था जबकि अश्रमिकों की संख्या 60% थी।
  • श्रमजीवियों की जनसंख्या गोवा में 39.6% दमन एवं दियु में 49.9% है।
  • हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय और दमन व दियु में श्रमजीवियों की जनसंख्या अधिक पाई जाती है।
  • निर्वाह और आर्थिक निर्वाह की क्रियाओं के निष्पादन लिए सर्वाधिक कामगारों की आवश्यकता होती है।

भारतीय श्रमजीवी जनसंख्या का व्यावसायिक संघटन

  • भारतीय जनसंख्या का व्यावसायिक संघटन द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र की तुलना में प्राथमिक क्षेत्र में श्रमिकों के अनुपात को अधिक दर्शाता है।
  • वर्ष 2011 के अनुसार कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 54.6% हिस्सा सिर्फ प्राथमिक क्षेत्र का है जबकि द्वितीयक क्षेत्र का हिस्सा 3.8% और तृतीयक क्षेत्र का हिस्सा 41.6% है।
  • वर्ष 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक भारतीय श्रमजीवी जनसंख्या को प्रमुख चार भागों में बाँटा गया था-
    • कृषक
    • कृषि मजदूर
    • घरेलू औद्योगिक श्रमिक
    • अन्य श्रमिक
  • उस समय महिलाओं की संख्या द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र की तुलना में प्राथमिक क्षेत्र में अधिक थी।
  • बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा मध्य प्रदेश में कृषक व कृषि मजदूरों की संख्या दिल्ली, पुदुचेरी और चंडीगढ़ के मुकाबले अधिक है।
  • वर्ष 2011 में श्रमिक गैर-घरेलू उद्योगों, व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण और मरम्मत के साथ अन्य कई सेवाओं से जुड़कर कार्य करते थे।

भाषाई वर्गीकरण

आप भाषा के वर्गीकरण को निम्न तालिका द्वारा समझ सकते हैं-

क्रम संख्यापरिवारउप-परिवारशाखा/वर्गवाक् क्षेत्र
1.आस्ट्रिक (निषाद) 1.38%आस्ट्रो-एशियाई
आस्ट्रोन-नेसियन
मॉन ख्मेर
मुंडा
मेघालय, निकोबार द्वीप समूह
पश्चिम बंगाल, बिहार,
ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश,
महाराष्ट्र भारत के बाहर
2.द्रविड़ 20%दक्षिण द्रविड़
मध्य द्रविड
उत्तर द्रविड़
तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल
आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा,
महाराष्ट्र बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश
3.चीनी-तिब्बती (किरात) 0.85%तिब्बती-म्यांमारी
सियामी चीनी
तिब्बत
हिमालय
उत्तरी असम
असम-म्यांमारी
जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश,
सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश,
असम, नागालैण्ड, मणिपुर,
मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय
4.भारतीय-यूरोपीय (आर्य) 73% इंडो-आर्यइरानी (फारसी)
दरदी
भारतीय आर्य
उत्तरी असम
भारत से बाहर
जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश,
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश,
बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम,गुजरात, महाराष्ट्र, गोआ
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