एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श अध्याय 7 आत्मत्राण

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Ekta Ranga
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हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपके लिए कक्षा 10वीं हिन्दी अध्याय 7 के एनसीईआरटी समाधान लेकर आए हैं। यह कक्षा 10वीं हिन्दी स्पर्श के प्रश्न उत्तर सरल भाषा में बनाए गए हैं ताकि छात्रों को कक्षा 10वीं स्पर्श अध्याय 7 के प्रश्न उत्तर समझने में आसानी हो। यह सभी प्रश्न उत्तर पूरी तरह से मुफ्त हैं। इसके के लिए छात्रों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायेगा। कक्षा 10वीं हिंदी की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए हुए एनसीईआरटी समाधान देखें।

Ncert Solutions For Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7

कक्षा 10 हिन्दी के एनसीईआरटी समाधान को सीबीएसई सिलेबस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह एनसीईआरटी समाधान छात्रों की परीक्षा में मदद करेगा साथ ही उनके असाइनमेंट कार्यों में भी मदद करेगा। आइये फिर कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श अध्याय 7 आत्मत्राण के प्रश्न उत्तर (Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7 Question Answer) देखते हैं।

कक्षा : 10
विषय : हिंदी (स्पर्श भाग 2)
पाठ : 7 आत्मत्राण (रवीन्द्रनाथ ठाकुर)

प्रश्न-अभ्यास

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

1. कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है ? 

उत्तर :- यहां कवि को अपने कृपालु ईश्वर से प्रार्थना करते हुए दिखाया है। कवि अपने प्रभु से यह कहना चाह रहा है कि हे ईश्वर! अगर आप मेरे जीवन में कठिनाइयों को भेजना चाहते हो तो भी मुझे इस बात से कोई डर नहीं लगे। क्योंकि संकट के बिना जीवन कहां। जिंदगी में आएं है तो बाधाओं से भी हमें ही छुटकारा पाना होगा। लेकिन प्रभु! मैं आपसे यही विनती करना चाहता हूं कि आप मुझे इतनी ताकत प्रदान करें कि मैं उन विपदाओं का बिना डरे सामना करूं। मुश्किल समय में भी मैं निर्भीक बना रहूं। यही मेरी आपसे कामना है।

2. ‘विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं’- कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?

उत्तर :- विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं’- कवि इस पंक्ति के द्वारा यह कहना चाह रहा है कि उसकी भगवान से ऐसी कोई प्रार्थना नहीं है कि भगवान उसके जीवन में कोई भी विपदाएं ना दे। बल्कि वह ईश्वर से यह प्रार्थना करना चाहता है कि उसके जीवन में मुश्किलें आए और वह उनका हिम्मत के साथ मुकाबला कर सके। कवि अपने मन से हर प्रकार के भय को खत्म करना चाहता है। वह भगवान से अपने लिए आत्मविश्वास और निर्भीकता की कामना मांगता है। वह हर पल भगवान की शरण में रहना चाहता है।

3. कवि सहायक के ना मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?

उत्तर :- कवि सहायक के ना मिलने पर ईश्वर से बस यही प्रार्थना करता है कि भले ही मुश्किल समय में कोई भी बंधु या सहायक उसका साथ ना दे। मगर ईश्वर आपसे यही विनती है कि मेरे आत्मबल में कोई कमी ना आए। मुझे इतनी शक्ति प्रदान कीजिए कि मुझे किसी के भी सहारे की जरूरत ना रहे। अगर किसी के सहारे की जरूरत भी पड़े तो वह आप ही हो, प्रभु। मुझे आपका ही सहारा चाहिए प्रभु। मुझे सांसारिक चीजों से कोई मोह माया नहीं रहे। मुझे अगर किसी के साथ की चाह रहे तो वह आप ही हो प्रभु।

4. अंत में कवि क्या अनुनय करता है ?

उत्तर :- अंत में कवि यह अनुनय करना चाहता है कि भगवान ही उसके जीने का सहारा बने। ईश्वर उसे इतनी शक्ति प्रदान करे कि उसे किसी के भी सहारे की जरूरत ही ना पड़े। ईश्वर से ही उसके दिन की शुरुआत हो और उनपर ही उसका दिन खत्म हो। उसे केवल ईश्वर का ही स्मरण रहे। ईश्वर आप मुझे चुनौतियां प्रदान कीजिए। बस आप उसपर इतनी कृपा बरसाए कि उसे इन चुनौतियों को सहन करने की शक्ति मिले। वह चाहता है कि ईश्वर उसे आत्मविश्वास से भर दे। कवि को ना साथी चाहिए ना संगी। कवि को तो बस हर पल ईश्वर का आशीर्वाद चाहिए। वह चाहता है कि सुख में और दुख में उसे केवल भगवान का ही स्मरण रहे। कविता के माध्यम से साफ पता चल रहा है कि कवि को सांसारिकता से कोई लेना देना नहीं है।

5. ‘आत्मत्राण ‘ शीर्षक की सार्थकता कविता के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- रवीन्द्रनाथ ठाकुर इस कविता के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है मनुष्य स्वयं की रक्षा खुद करें। आत्मत्राण का अर्थ होता है हमारी आत्मा की भय और दुख से मुक्ति। आत्मत्राण कविता के माध्यम से कवि यह समझाना चाहता है कि इस दुनिया में जिंदा रहने के लिए हिम्मती दिल चाहिए। यह संसार बहुत बड़ा है। इस संसार में सुख से ज्यादा दुख हैं। कवि कहना चाह रहा है कि इंसान भगवान के रास्ते को अपनाकर हर प्रकार के दुखों से छुटकारा पा सकता है। जब एक इंसान पर भगवान की कृपा होती है तो उसे कोई भी प्रकार की बाधाएँ विचलित नहीं कर सकती है। कवि ने कविता के शीर्षक का इस्तेमाल सार्थकता से किया है।

6. अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना के अतिरिक्त आप और क्या – क्या प्रयास करते हैं ? लिखिए।

उत्तर :- हम अपने जीवन में अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु प्रार्थना के अलावा जो कर सकते हैं वह है हमारा किसी चीज़ को प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास और मेहनत। हमारे जीवन में ईश्वर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम दुनिया की हर चीज़ पाने के लिए भगवान से ही विनती कर सकते हैं। लेकिन ईश्वर भी यह नहीं कहता है कि उसका भक्त केवल उसपर ही आश्रित रहे। ईश्वर भी यही चाहता है कि मनुष्य शक्तिशाली बने। किसी भी चीज़ को हासिल करने के लिए चाहिए जी तोड़ मेहनत और चुनौतियों को पार करने का साहस। ईश्वर भी उसी से ही खुश होता है जो कि प्रार्थना के साथ कड़ा परिश्रम भी करे।

7. क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है। यदि हाँ, तो कैसे ?

उत्तर :- जी हाँ, रवीन्द्रनाथ ठाकुर की यह कविता दूसरे कवियों के प्रार्थना गीतों से अलग है। इसके पीछे भी एक बड़ा कारण है। दरअसल यह कविता दूसरी कविताओं की तरह भौतिकवाद को को महत्व नहीं देती। इस कविता के माध्यम से कवि ईश्वर के प्रति अपना प्रेम प्रकट कर रहा है। वह हर पल ईश्वर की याद में ही डूबे रहना चाहता है। कवि भगवान से यह प्रार्थना करता है कि ईश्वर उसे इतनी शक्ति प्रदान करे कि वह दुख के दिनों में भी विचलित ना हो। उसे सांसरिक चीजों से ज्यादा ईश्वर से प्रेम है। उसे हर पल भगवान का साथ चाहिए। वह भगवान से दोस्त प्राप्त करने की भी कामना नहीं करता। उसके लिए उसके भगवान ही सब कुछ है। वह ईश्वर से खुद के लिए आत्मविश्वास की कामना करता है। वह चाहता कि भगवान उसे इतनी हिम्मत प्रदान करे कि वह सारी बाधाओं को पार कर जाए। लेकिन दूसरे कवियों की कविताओं में भौतिकवाद को ज्यादा महत्व दिया जाता है। उन सारी कविताओं में कवि ईश्वर से सांसरिक चीज़ें प्राप्त करने की मांग करते हैं। ऐसे कवियों की कविताओं में मोह माया पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

(ख) निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1.
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।

उत्तर- इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि उसे संसार की कोई भी चीज़ डगमगा ना सके। वह सुख के दिन में भी अपना सिर झुकाकर केवल ईश्वर को ही याद करे। वह ईश्वर से खुद के लिए हिम्मत प्राप्त करने की प्रार्थना करता है। वह चाहता है कि सुख के दिनों में भी उसे बिल्कुल भी घमंड नहीं आए। वह हर पल ईश्वर की भक्ति में ही डूबे रहना चाहता है। कवि हर पल और हर घड़ी में केवल परमात्मा को ही याद करना चाहता है।

प्रश्न 2.
हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही तो भी मन में ना मानूँ क्षय।

उत्तर- इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाह रहा है कि अगर उसे इस संसार में सुख कम और दुख ज्यादा मिले तो भी उसे वह विचलित ना कर पाए। कवि अपने लिए ईश्वर से हिम्मत पाने की प्रार्थना कर रहा है। वह चाहता है कि भगवान उसके अंदर आत्मविश्वास और साहस कूट कूट के भर दे। इस हिम्मत और आत्मविश्वास से वह दुनिया में आने वाली हर चुनौतियों को पार कर जाए। कवि चाहता है कि वह मुश्किलों में भी कभी ना टूटे। उसके अंदर चुनौतियों को हारने की ताकत बनी रहे।

प्रश्न 3.
तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।

उत्तर- ऊपर दी गई पंक्ति में कवि भगवान से अपनी भावनाओं को प्रकट कर रहा है। वह ईश्वर से यह प्रार्थना करना चाहता है कि ईश्वर उसे हिम्मत प्रदान करे। वह ईश्वर से सांत्‍वना प्राप्त नहीं करना चाहता है। वह तो भगवान से आत्मविश्वास प्राप्त करने की कामना करता है। कवि भगवान से हिम्मत पाने की विनती इसलिए करता है ताकि वह सांसरिक बाधाओं को बिना परेशानी के हरा सके। कवि चाहता है कि वह अंदर से इतना मजबूत बन जाए कि दुनिया की कोई भी चीज़ उसे डरा ना पाए।

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