मृदा प्रदूषण पर निबंध (Essay on Soil Pollution in Hindi)

मृदा प्रदूषण पर निबंध (Essay on Soil Pollution in Hindi)- हमारे देश की मृदा या मिट्टी बाकी देशों के मुकाबले सबसे अधिक उपजाऊ है। हमारे देश का किसान कड़ी मेहनत करके इसी मिट्टी पर हमारे लिए अन्न, फल, सब्जियाँ, फूल आदि चीज़ें उगाता है। हमारे देश के जवान इसी मिट्टी में जन्म लेते हैं और देश की रक्षा करते हुए इसी मिट्टी में शहीद हो जाते हैं। इसके बावजूद हमारे देश को मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने और जनसंचार के अलग-अलग माध्यमों से लोगों तक प्रदूषण की समस्या और इसके प्रभावों का प्रचार प्रसार करने के बाद भी प्रदूषण (Pollution) या मृदा प्रदूषण की समस्या चिंता का विषय है।

मृदा प्रदूषण पर निबंध (Essay on Soil Pollution in Hindi)

मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारी प्रकृति (Nature) पर पड़ता है और वह हमारे वातावरण (Environment) को प्रदूषित करता है। मृदा प्रदूषण क्या है, मृदा प्रदूषण के कारण, मृदा प्रदूषण रोकने के उपाय आदि जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारे इस पेज के ज़रिए से मृदा प्रदूषण पर निबंध (Essay on Soil Pollution) पढ़ सकते हैं। मृदा प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (Essay on Soil Pollution in Hindi) का प्रयोग आप स्कूल और कॉलेजों में आयोजित होने वाली मृदा प्रदूषण निबंध (Soil Pollution Essay) प्रतियोगिता में भी कर सकते हैं। हमनें हिंदी में मृदा प्रदूषण पर निबंध (Soil Pollution Essay in Hindi) को बढ़े ही सरल, सहज और आसान शब्दों में लिखने का प्रयास किया है। हमें उम्मीद है कि हमारा मृदा प्रदूषण पर हिंदी में निबंध आपके लिए ज़रूर उपयोगी साबित होगा। नीचे से मृदा प्रदूषण निबंध पढ़ें और अपनी जानकारी को और बढ़ाएँ।

मृदा प्रदूषण पर निबंध
Soil Pollution Essay in Hindi

मृदा प्रदूषण प्रस्तावना

मृदा को ही हम मिट्टी (Soil) कहते हैं। हमारे देश में मुख्य छः अलग-अलग प्रकार की मिट्टी पाई जाती है जिसका अपना एक अलग महत्त्व और अपनी एक अलग उपयोगिता है। हर प्रकार की मृदा चट्टानों और पहाड़ों से निकलती है। मृदा या मिट्टी भूगोल और प्रकृति से जुड़ा सबसे महत्त्वपूर्ण विषय है। मिट्टी के बारे में हम मृदा विज्ञान का अध्ययन करते समय ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी हासिल कर सकते हैं। प्रकृति ने मिट्टी को ऐसी शक्तियाँ दी हैं जिनके बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है। इसलिए मृदा को प्रदूषण से बचाना बहुत ज़रूरी है ताकि इसकी उपजाऊ शक्ति को कोई हानि ना पहुँचे। सबसे पहले हम जानते हैं कि मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) क्या है और इसके क्या कारण हैं।

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मृदा प्रदूषण क्या है?

मृदा प्रदूषण या मिट्टी के प्रदूषण को हम भूमि प्रदूषण भी कहते हैं। अगर इसे आसान भाषा में समझें, तो जब मिट्टी में जहरीले रसायन, प्रदूषक और दूषित पदार्थ अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जिनसे मनुष्य, जानवरों, पेड़-पौधों, नदियों आदि को खतरा हो, उसे मृदा प्रदूषण कहते हैं। कभी-कभी ये भी देखा जाता है कि जब मिट्टी में दूषित पदार्थ का स्तर कम होता है, उसके बावजूद भी मृदा प्रदूषण आसानी से हो जाता है। मिट्टी का प्रदूषण तब ज़्यादा होता है जब मनुष्य द्वारा प्रत्यक्ष रूप से मिट्टी में ऐसे हानिकारक पदार्थो, रसायनों या वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाए, जो जीवित चीजों को नुकसान पहुँचाते हों और उन्हें नष्ट कर देते हों।

मृदा प्रदूषण के कारण

मृदा प्रदूषण होने का कोई एक निश्चित कारण नहीं है बल्कि इसके होने के कई अलग-अलग कारण सामने आते हैं। हमारी भूमि पर जब कुछ अपशिष्ट पदार्थ जमा हो जाते हैं, तो वह मृदा प्रदूषण को जन्म देते हैं। मृदा प्रदूषण के कारण या भूमि प्रदूषण के स्रोत इस प्रकार से हैं-

  • घरेलू अपशिष्ट
  • औद्योगिक एवं खनन अपशिष्ट
  • नगरपालिका अपशिष्ट
  • कृषि अपशिष्ट
  • भू-क्षरण या मिट्टी का कटाव / मृदा अपरदन
  • उर्वरको का अत्यधिक उपयोग
  • अत्यधिक लवण और पानी

इन कारणों के अलावा कई और भी कारण हैं, जिनसे मृदा प्रदूषण होता है, जैसे- घर, अस्पताल, स्कूल और बाजार में इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक की चीज़ें, पेड़ों और जंगलों की तेजी से कटाई करना, घरों से फेंके जाने वाले टूटे काँच, प्लास्टिक, फर्नीचर और पॉलिथीन, उघोगों और कारखानों से निकलने वाले रसायन आदि। जब बारिश होती है, तो उसके साथ-साथ कुछ ऐसे दूषित पदार्थ ज़मीन में मिल जाते हैं, जो भूमि प्रदूषण का कारण बनते हैं।

मृदा प्रदूषण के प्रभाव

मृदा प्रदूषण मनुष्यों के साथ-साथ पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और प्रकृति को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है। मृदा प्रदूषण का सबसे ज़्यादा दुष्प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ता है, क्योंकि वह ज़्यादा अतिसंवेदनशील और कोमल होते हैं। जब बच्चे मैदानी इलाकों में खेलते या घूमते हैं, तो वह मिट्टी के ज़्यादा संपर्क में आ जाते हैं। इसीलिए बड़ों की तुलना में बच्चों को मृदा प्रदूषण से ज़्यादा खतरा होता है। वैसे मृदा प्रदूषण से हर उम्र का इंसान प्रभावित हो सकता है। मृदा प्रदूषण से होने वाले अलग-अलग दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं-

स्वास्थ्य पर प्रभाव-

मिट्टी प्रदूषण से लोग बीमार हो सकते हैं। वह गंभीर और घातक बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। इसीलिए हमें इससे अपने आपको सुरक्षित रखना होगा।

पेड़-पौधों के विकास पर प्रभाव-

मृदा प्रदूषण से प्रकृति के संतुलन पर भी असर पड़ता है। मृदा प्रदूषण की वजह से कई तरह के जीवाणु मिट्टी में मिल जाते हैं, जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को नष्ट कर देते हैं।

मिट्टी की उर्वरता में कमी-

मिट्टी में मिलने वाले जहरीले रसायन मिट्टी की उर्वरता या उत्पादकता को धीमा कर सकते हैं, जिससे मिट्टी की उपज पूरी तरह से खत्म भी हो सकती है। यदि कोई किसान प्रदूषित और खराब मिट्टी का इस्तेमाल खेती करने के लिए करता है, तो उसकी फसल में पोषक तत्व कम होकर जहरीले पदार्थ शामिल हो सकते हैं।

विषाक्त धूल-

जब धूल उड़ती है, तो उसके साथ विषाक्त और बदबूदार गैस भी हवा में फैल जाती है, जिससे हम सभी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस तरह की गंध लोगों की सुविधा में बाधा पैद करती है।

मिट्टी की संरचना में परिवर्तन-

जब मिट्टी में पाए जाने वाले जीवों की मृत्यु उसी मिट्टी में हो जाती है, तो मृदा संरचना में बदलाव हो सकता है।

मृदा प्रदूषण को रोकने के उपाय

आधुनिक युग में मृदा प्रदूषण की समस्या बढ़ती ही जा रही है और यह धीरे-धीरे भयंकर रूप ले रही है। अगर आज ही इस समय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आने वाले कल में और भी विकराल रूप धारण कर लेगी और फिर इससे पीछा छुड़ाना नामुमकिन हो जाएगा। यदि हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करना ही शुरू कर दें, तो उम्मीद है की ये मृदा प्रदूषण की समस्या जल्द खत्म हो जाए। मृदा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हम अपने-अपने स्तर पर कुछ उपाय कर सकते हैं, जैसे-

  1. इधर-उधर कचरा फेंकना बंद करें।
  2. फैक्ट्री के कचरे को मिट्टी में न फेंके।
  3. अधिक से अधिक पेड़ लगाएं।
  4. सीमित रसायन का इस्तेमाल करें।
  5. गैर-बायोडिग्रेडेबल उत्पादों के बजाय बायोडिग्रेडेबल उत्पादों का उपयोग करें।
  6. पॉली बैग के उपयोग से बचें।
  7. प्लास्टिक के बर्तनों और अन्य प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग न करें।
  8. कागज या कपड़े की थैलियों का उपयोग करें। 
  9. कागज बर्बाद न करें बल्कि इसके उपयोग को सीमित करें।
  10. इन विचारों के बारे में जागरूकता फैलाएँ।

निष्कर्ष

अगर ठान लिया जाए, तो फिर किसी भी लक्ष्य को पाना असंभव नहीं है। आज हमारे सामने प्रदूषण की समस्या पर जीत हासिल करने का सबसे बड़ा लक्ष्य है। आज हमारे पास प्रदूषण या मृदा प्रदूषण जैसे प्रदूषण के अन्य प्रकारों को कम करने के लिए कई सुझाव और तरीके मौजूद हैं। बस अगर किसी चीज़ की ज़रूरत है, तो वह है सही समय पर सही प्रयास करने की और दृढ़ इच्छाशक्ति की। फिर कोई भी लक्ष्य दूर नहीं।

मृदा प्रदूषण से जुड़े पूछे जाने वाले सवाल- FAQ’s

People also ask

प्रश्न- मृदा प्रदूषण किसे कहते हैं?

उत्तर- जब जहरीले रसायन मिट्टी में मिल जाएं, जो हम सभी के लिए खतरनाक हों उसे मृदा प्रदूषण कहते हैं। मृदा प्रदूषण से मृदा की उपज क्षमता पर सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न- मृदा प्रदूषण परिणाम?

उत्तर- मिट्टी का प्रदूषण फसल, पौधे, मानव, जानवर आदि सभी की सेहत पर बुरे और गंभीर परिणाम छोड़कर जाता है।

प्रश्न- मृदा प्रदूषण के उपाय?

उत्तर- कूड़ा-करकट इधर-उधर न फैंकना, कीटनाशक पदार्थो का कम से कम इस्तेमाल करना, अजैविक कचरे का सही से निस्तारण करना जैसे छोटे-छोटे बदलाव ही मृदा प्रदूषण को रोकने के उपाय हैं।

प्रश्न- मृदा प्रदूषण क्या है मृदा प्रदूषण के स्रोतों की व्याख्या करें?

उत्तर- जब मिट्टी में दूषित पदार्थ शामिल होने लगें, तो वह मृदा प्रदूषण कहलाता है। घरेलू अपशिष्ट, कृषि अपशिष्ट आदि मृदा प्रदूषण के स्रोत हैं। 

प्रश्न- मृदा प्रदूषण के कारण कौन कौन से हैं?

उत्तर- मृदा प्रदूषण मुख्यतः मानवजनित स्रोत से अधिक होता है, जैसे- घरेलू कचरा, पशुधन, नगरपालिका अपशिष्ट, कृषि रसायन, पेट्रोलियम आदि।

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