भारत की राष्ट्रभाषा क्या है? क्या हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है?

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Ekta Ranga

भारत की राष्ट्रभाषा क्या है? क्या हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है?- क्योंकि मैं भारत के उत्तरी हिस्से की रहवासी हूं इसलिए हिंदी भाषा से मेरा जुड़ाव बचपन से ही है। हिंदी भाषा के आगे मुझे अंग्रेज़ी भाषा भी फीकी लगती है। मैं जहां भी जाती हूं, तो आशा यही करती हूं कि सामने वाला भी हिंदी भाषा में मुझसे वार्तालाप करे। मैं जब छोटी थी तब एक बार परीक्षा में मैंने हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बता दिया था। लेकिन घर आकर मुझे एहसास हुआ कि मैंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बताकर गलती कर दी थी। शायद एक मैं ही नहीं हूं जिसे ऐसा लगा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें यही लगता है कि हिंदी भारत कि राष्ट्रभाषा है। जबकि ऐसा है ही नहीं। हिंदी को इस देश की राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है।

हिंदी राष्ट्रभाषा है या नहीं?

तो आज का हमारा विषय बड़ा ही दिलचस्प है। आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि आखिर हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का दर्जा मिला हुआ है की नहीं। भारत देश को धर्मनिरपेक्ष देश कहा जाता है। इस देश में जितने ही लोग रहते हैं उतने ही प्रकार के धर्म भी हैं यहां। इसी देश में 22 भाषाओं को बोला जाता है। इन 22 भाषाओं को भारत की अनुसूचित भाषा की श्रेणी में डाला जाता है।

भारत की दो आधिकारिक भाषाओं का नाम है हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा। लेकिन हमारे देश की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। यह सच है कि भारत में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का ही इस्तेमाल होता है। हिंदी को सम्मान देने के लिए 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस भी मनाया जाता है। लेकिन आज भी हिंदी राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं कर पाई है। इसके पीछे क्या कारण रहा होगा कि हिंदी राष्ट्रभाषा ना होकर राजभाषा ही रह गई। चलिए इस लेख के माध्यम से समझते हैं।

हिंदी राजभाषा या राष्ट्रभाषा

इस देश में आज से हज़ार वर्ष पूर्व शायद ही कोई संस्कृत भाषा के अलावा दूसरी भाषा का इस्तेमाल करता होगा। लेकिन बाद में धीरे-धीरे इसी संस्कृत भाषा से एक और भाषा प्रचलन में आने लगी। यहां पर मैं हिंदी भाषा की बात कर रही हूं। हिंदी संस्कृत भाषा का ही हिस्सा है। हिंदी को आधुनिक भाषा का दर्जा दिया जाता है। चलिए हिंदी के सफरनामे को थोड़े और सरल शब्दों में समझते हैं।

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प्रस्तावना

सबसे पहले संस्कृत भाषा अस्तित्व में आई। संस्कृत के बाद पालि भाषा ने लोगों के दिलों में जगह बना ली। पालि से ही उपजी प्राकृत भाषा। बाद में प्राकृत भाषा ने अपभ्रंश को जन्म दिया। क्योंकि बढ़ते जमाने के साथ अपभ्रंश भाषा को और सरल बनाने की जरूरत लग रही थी। इसलिए अपभ्रंश को अवहट्ट में परिवर्तित कर दिया गया। इसी अवहट्ट को पूरी तरह से आसान बनाने के प्रयास में आखिरकार एक ऐसी भाषा ने जन्म लिया जो कि आज के दौर में पूरी दुनिया में पसंद की जाती है। अवहट्ट भाषा के बाद हिंदी भाषा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गई।

हिंदी शब्द कैसे प्रचलन में आया?

हमारा देश हिंदुस्तान नाम से जाना जाता है। लेकिन क्या आप सभी को यह पता है कि यह नाम कैसे प्रचलन में आया होगा? शायद किन्हीं को यह पता हो और किन्हीं को नहीं। दरअसल हिंदुस्तान शब्द सिंधु शब्द से ही आया है। विदेश से आने लोग सिंधु घाटी के पास रहने वाले लोगों को सिंधु कहते थे। सिंधु शब्द से ही बाद में हिन्द शब्द की उत्पति हुई। यह हिन्द शब्द ही बाद में हिंदी में परिवर्तित हो गया। फारसियों ने हिंदी शब्द को प्रसिद्ध कर दिया।

हिंदी भाषा की बोलियाँ

हिंदी भाषा में तकरीबन 18 बोलियाँ हैं। यह 18 बोलियाँ कुछ इस प्रकार हैं- अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, हड़ौती, खड़ी बोली, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया, कुमाउँनी, मगही, मेवाती, फ़ीजी, हिन्दी। इन सभी बोलियों की अपनी अलग पहचान है। इन सभी में अवधी और ब्रजभाषा में जो काव्य रचनाएँ की गईं वह ज्यादा प्रसिद्ध हुईं। उदाहरण के तौर पर आप कवि तुलसीदास और सूरदास की रचनाओं को देख सकते हैं। ऐसा नहीं है कि अन्य बोलियों में की गई काव्य रचनाएँ प्रसिद्ध नहीं हुईं। अन्य बोलियों के प्रसिद्ध कवियों में आप मैथिलीशरण गुप्त और मीराबाई का उदाहरण ले सकते हैं।

स्वतंत्रता आंदोलन और हिंदी

स्वतंत्रता आंदोलन में भी हमारी राजभाषा हिंदी ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह ऐसा वक़्त था जब स्वतंत्रता पाने के लिए पूरा देश एकजुट हो गया था। उस समय भले ही कोई अलग-अलग राज्यों से था लेकिन सभी ने अपने राज्य की भाषा का इस्तेमाल करने के बजाय हिंदी को चुना। गांधीजी ने तो यह कहा भी था कि हम सभी भारतवासियों को स्वराज्य पाने के लिए हिंदी भाषा को ही अपनी ताकत बनानी होगी। गांधीजी की बात को अमल में लाकर भारत के सभी कवियों, लेखकों और कलाकारों ने हिंदी भाषा के जरिए आम जनता तक स्वतंत्रता का पैगाम पहुंचाया। स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी भाषा ने नई ऊंचाइयों को छू लिया।

विदेशों में हिंदी भाषा का प्रयोग

आज के समय में हिंदी भाषा की प्रसिद्धि बढ़ती ही जा रही है। भारत देश में तो हिंदी भाषा का बोलबाला है ही। लेकिन भारत के अलावा विदेशों में भी हिंदी बड़े ही चाव से बोली और समझी जाती है। भारत के अलावा जिन देशों में हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाता है वह है- फ़िजी, मॉरीशस, गयाना, सूरीनाम, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात आदि। इन देशों में हिंदी भाषा का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। विदेशों में हिंदी की लोकप्रियता के चलते ही आज पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी भाषा तो तीसरा स्थान प्राप्त है।

क्या हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है?

यह आज भी बड़ा ही दिलचस्प विषय है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है कि नहीं। इसका उत्तर स्पष्ट है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं बल्कि राजभाषा है। सभी यही सोचते हैं कि जब हमारे देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं तब भी हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा क्यों नहीं है? यहां तक कि सिनेमा जगत भी हिंदी में ही फिल्में बनाता है। हमारे देश में दैनिक समाचार पत्र भी सबसे अधिक हिंदी भाषा में ही प्रकाशित होते हैं। तो फिर ऐसा क्या है जो हिंदी को आज तक भी राष्ट्रभाषा बनने का अवसर नहीं देता।

इसको संक्षेप में समझने के लिए आपको इतिहास में चलना होगा। बात है वर्ष 1946 से 1965 तक की। 1946 में जब इस देश का संविधान तैयार किया जा रहा था तो उस समय यह चर्चा ज़ोरों पर थी कि हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाएगा। लेकिन यह राह आसान नहीं थी। पूरे देश में इस बात को लेकर आक्रोश फैल गया। भारत में भाषा को लेकर दंगे होने लगे। वर्ष 1965 में लाल बहादुर शास्त्री जी की ओर से आखिरी बार हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का एक और प्रयास किया गया। लेकिन यह प्रयास भी असफल रहा। आखिरकार हिंदी को केवल राजभाषा का दर्जा ही मिल पाया।

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