ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay In Hindi)

Photo of author
Ekta Ranga

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global Warming Essay In Hindi)- ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) क्या है भला? स्कूल के दिनों में हमें इस टाॅपिक पर निबंध लिखने को दिया जाता था। हमारी टीचर हमें यह सीख दिया करती थी कि हमें पेड़ों को बचाना चाहिए। एक और बात जिस पर टीचर हमें सीख दिया करती थी वह थी बिजली की बचत। वह हमें कहत थी कि हमें बिजली का सदुपयोग करना चाहिए। जहां भी हमें अनावश्यक लाइट जलती हुई दिखे हमें तुरंत ही लाइट बंद कर देनी चाहिए। स्कूल के दिनों में हम सभी बच्चों को वह कंजूस लगती थी। पर बड़े होने पर हमें अपनी गलती का एहसास हो गया।

Essay On Global Warming In Hindi

अखबारों में यह अक्सर पढ़ने को मिलता है कि ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर विषय पर दुनिया के अनेक पर्यावरणविद् अलग अलग भाषण दे रहे हैं। वह इस विषय को लेकर दुनिया के लोगों को सचेत करना चाहते हैं। यह अजीब विडंबना है कि एक तरफ जहां यह लोग हम सभी को ग्लोबल वार्मिंग के प्रति सचेत करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ यह खूद ही पर्यावरण प्रदूषण के भागीदार बन रहे हैं।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) एक गंभीर और अहम मुद्दा बन गया है। इसने दुनिया के हर देशों को प्रभावित कर रखा है। तो आज के हमारा विषय ग्लोबल वार्मिंग पर आधारित है। आज हम इस अहम मुद्दे को इस निबंध के माध्यम से समझेंगे। हम आज हिंदी में यह जानेंगे कि आखिर यह ग्लोबल वार्मिंग (What is global warming in hindi) है क्या?

प्रस्तावना

मानव ने आदिमानव से लेकर आधुनिक मानव तक पहुंचने में बहुत लंबा सफर तय किया है। एक समय ऐसा था जब हम इंसानों को कोई भी तरह की जानकारी नहीं थी। लेकिन बदलते समय के साथ हमारे अंदर नए बदलाव आते गए। सबसे बड़ी उपलब्धि अगर हम इंसानों को हुई तो वह तकनीकी विकास के चलते हुई। तकनीकी विकास ने हमारे जीवन को एक नया आयाम दिया। क्या इससे पहले हमने कभी यह सपने में भी यह सोचा था कि एक दिन हम हवा में भी उड़ेंगे। लेकिन हवाई जहाज के अविष्कार के बाद यह सपना साकार हो गया। 18वी शताब्दी से औद्योगिक क्रांति की शुरुआत जबरदस्त हुई। फिर धीरे-धीरे उद्योग बढ़ते गए।

औद्योगिक क्रांति की वजह से दुनिया को बहुत फायदा पहुंचा। इस क्रांति ने यातायात को बहुत आसान बना दिया। इस क्रांति से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी तेजी आ गई। पर यहां पर एक बात गौर करने लायक है। यह एक बहुत पुरानी कहावत है कि विकास के साथ विनाश भी कदम से कदम मिलाकर चलते है। अगर विकास है तो वहां पर विनाश भी होता है। आज जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम गड़बड़ा रहे हैं। खराब मौसम के चलते धरती को बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्षा चक्र, हवा के पैटर्न, चक्रवात की आवृत्ति, समुद्र के स्तर में आज बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यह सब देखना बहुत चिंताजनक है। हमें समय रहते कुछ ठोस कदम उठाने होंगे।

ये भी पढ़ें :-

पर्यावरण पर निबंधयहाँ से पढ़ें
पृथ्वी दिवस पर निबंधयहाँ से पढ़ें
पर्यावरण प्रदूषण पर निबंधयहाँ से पढ़ें
वायु प्रदूषण पर निबंधयहाँ से पढ़ें
जल प्रदूषण पर निबंधयहाँ से पढ़ें

ग्लोबल वार्मिंग क्या है?

जब धरती का तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगे तो समझ लिजिए कि यह ग्लोबल वार्मिंग होने का संकेत है। ग्लोबल वार्मिंग एक प्रकार की ऐसी प्रकिया है जिसमें धरती का तापमान बढ़ता चला जाता है। ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण धरती पर ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड या ग्रीनहाउस गैस का फैलना है। इसी के चलते धरती को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रीनहाउस गैस की वजह से ग्लोबल वार्मिंग ज्यादा भयानक रूप में बदल गई है। मीथेन, कार्बन डाय ऑक्साइड, ऑक्साइड और क्लोरो-फ्लूरो-कार्बन यह सब ग्रीनहाउस गैस का रूप है। ग्लोबल वार्मिंग के ही चलते नदियां भी सूख रही है। बहुत से देश आज मौसमी बारिश के लिए तरस रहे हैं। यह गैसें धरती को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा रही है। धरती पर आज के समय में कुछ भी सामान्य नहीं रहा। हम मानवों ने धरती का अत्यधिक मात्रा में दोहन कर लिया है।

ग्लोबल वार्मिंग होने के कारण

ग्लोबल वार्मिंग होने के निम्नलिखित कारण है –

1) वाहनों के इस्तेमाल के चलते- आज दुनियाभर में वाहनों की भारी भीड़ हो गई है। आज सभी को वाहन की जरूरत रहती है। इसी के चलते आज हमारे पर्यावरण पर भारी प्रभाव पड़ रहा है। आज कार्बन-डाइऑक्साइड फैलने का सबसे बड़ा कारण वाहन ही है। लोगों को हर एक काम के लिए आज पेट्रोल से चलने वाले वाहन चाहिए। आज हर कोई पैदल चलने में या साइकिल का उपयोग करने में शर्म महसूस करता है। इसी शर्म ने ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ा दिया है।

2) पेड़ और वन की कटाई- पेड़ हमेशा से ही मनुष्य के सच्चे दोस्त रहे हैं। पेड़-पौधों ने मनुष्य के साथ कभी भी भेदभाव नहीं किया। लेकिन बदले में मनुष्य ने क्या दिया। बदले में इंसानों ने पेड़ों का केवल दोहन किया। आज पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। लोगों को यह नहीं पता कि जिन पेड़ों को वह काट रहे हैं उनसे वह ताजा ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं। यह पेड़ ही है जो प्रदूषित वातावरण की वजह से फैलने वाली कार्बन-डाइऑक्साइड को अपने अंदर खींच लेते हैं। अब जब हर जगह पेड़ कट रहे हैं तो ऐसे में कार्बन-डाइऑक्साइड के चलते ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है।

3) जनसंख्या में वृद्धि- आज दुनियाभर में जनसंख्या में सैलाब आ गया है। भारत की बढ़ती जनसंख्या ने सभी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक समय पर जो भारत चीन से पीछे था वह अब जनसंख्या के मामले में चीन से आगे बढ़ गया है। क्या आपको पता है कि जनसंख्या की वजह से ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी हो रही है। इसके पीछे कारण यह है कि मनुष्य पहले ऑक्सीजन को ग्रहण करते हैं और कार्बन-डाइऑक्साइड का परित्याग करते हैं। कार्बन-डाइऑक्साइड ही ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है।

4) कृषि- आज खेती के बदौलत ही हमारा जीवन चल रहा है। परंतु किसानों ने खेती को भी नहीं बख्शा। आज का किसान वर्ग खेत में उगने वाली फसलों पर कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं। इन्हीं दवाइयों से जहरीली गैस निकलती है जो कि ग्लोबल वार्मिंग का एक सबसे बड़ा कारण है।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग आज के समय में एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते धरती तबाह हो रही है। तो आइए हम जानते हैं ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव-

1) प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी- ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के चलते आज प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। आज के समय में बाढ़, भूस्खलन, सूखा, भूकंप और सुनामी आदि हमें कई बार देखने को मिल रहे हैं।

2) तापमान में लगातार बढ़ोतरी- ग्लोबल वार्मिंग की ही वजह से आज तापमान लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते तापमान के चलते ही आज सुखे का सामना करना पड़ रहा है, जंगलों में आग लग रही है। बढ़ते तापमान के चलते ही आज ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं।

3) जीव-जंतुओं पर असर- आज के समय में ग्लोबल वार्मिंग एक बड़ी समस्या है और यही जीव-जंतुओं पर भी बुरा असर डाल रही है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से आज जंगल खत्म हो रहे हैं। क्योंकि जंगल और जीव-जंतु एक दूसरे से जुडे हैं इसलिए जब वन खत्म हो जाएंगे तो जीव-जंतुओं का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा।

4) मृत्यु दर में वृद्धि- आप सोच रहे होंगे कि ग्लोबल वार्मिंग और मृत्यु दर में वृद्धि के बीच क्या संबंध हो सकता है? ग्लोबल वार्मिंग आज हमें काफी नुकसान पहुंचा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते प्राकृतिक आपदाएं और अनेक तरह की बीमारियां फैल रही है। इन्ही कारणों के चलते मृत्यु दर में भी वृद्धि देखने को मिल रही है।

5) बिजली का उपयोग बढ़ेगा- जैसे जैसे धरती गर्म होती होती जाएगी वैसे वैसे बिजली का दोहन होना शुरू हो जाएगा। बिजली का खर्च जितना ज्यादा बढ़ेगा उतना ही ज्यादा ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी बढ़ेगा।

ग्रीनहाउस गैसों का नाम

1 ) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)– कार्बन-डाइऑक्साइड एक ऐसी गैस होती है जो धरती के लिए अति आवश्यक मानी जाती है। इसका वैज्ञानिक फॉर्मूला CO2 होता है। यह गैस रंगहीन होती है। यहां तक की इसकी कोई गंध भी नहीं होती है। यह पानी में घुलनशील होती है। हम इंसान भी कार्बन-डाइऑक्साइड गैस को छोड़ते हैं। ज्यादा स्तर पर कार्बन-डाइऑक्साइड के फैलने से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। पेट्रोल से चलने वाले वाहन भी कार्बन-डाइऑक्साइड गैस को बढ़ावा देते हैं।

2) मीथेन (CH4)– मीथेन गैस का वैज्ञानिक फॉर्मूला CH4 होता है। यह गैस भी कार्बन-डाइऑक्साइड की ही तरह रंगहीन और बिना कोई गंध के होती है। इस गैस का नाम मेथनाॅल से आया है। इस गैस का उपयोग ऑटोमोबाइल, ओवन, बिजली के उत्पादन, गैस कुकर आदि में किया जाता है। मीथेन गैस को आमतौर पर जहरीली नहीं मानी जाती है। लेकिन दूसरी गैस के संपर्क में आने से यह जहरीली बन जाती है। मीथेन को सबसे शक्तिशाली गैस का भी दर्जा मिला हुआ है।

3 ) नाइट्रस ऑक्साइड (N2O)– नाइट्रस ऑक्साइड का वैज्ञानिक फॉर्मूला N2O है। इसकी गंध थोड़ी मीठी होती है और यह गैस रंगहीन भी होती है। इसको दंत चिकित्सा में दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसे सूंघने पर खुशी की अनुभूति होती है।

4) फ्लोरिनेटेड गैस– इस प्रकार की गैस आमतौर पर फ्रीज और एयर कंडिशनर आदि में इस्तेमाल की जाती है। यह जब वातावरण में ज्यादा समय तक रहती है तो यह कार्बन-डाइऑक्साइड से भी अधिक खतरनाक हो सकती है।

5) जल वाष्प (water vapour)– जल वाष्प गैस की अवस्था होती है। जल वाष्प को हम देख नहीं सकते हैं। यह बादलों, कोहरे या धुंध में मौजूद रहती है।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध 100 शब्दों में

हम अपने पूर्वजो से यह सुना करते थे कि उनके जमाने में और अभी के जमाने में बहुत बड़ा अंतर आ गया है। और यह सच भी है। पहले के जमाने में कहां तो कारखाने और कारें हुआ करती थी। जब से औद्योगिक क्रांति ने रफ्तार पकड़ी तब से वातावरण में बदलाव आना शुरू हो गया। पहले के जमाने में लोग मौसम का अनुमान आसानी से लगा लेते थे। लेकिन आज के दौर में जलवायु परिवर्तन के चलते यह संभव नहीं हो पाता है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते ग्रीनहाउस गैस लगातार बढ़ती जा रही है। आज प्राकृतिक आपदाएं भी तेजी से बढ़ रही है। बाढ़, भूस्खलन, ज्वालामुखी, सुनामी, भूकंप जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही है।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध 200 शब्दों में

एक समय था जब धरती पर कभी ऊनी गैंडे रहा करते थे। यह बड़े ही मजे से अपना जीवनयापन कर रहे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह जानवर कोई 50 हजार साल पहले धरती पर निवास किया करते थे। इस जानवर ने शाकाहार को अपना रखा था। यह ठंड में निवास करने वाले जानवरों में से एक थे। लेकिन जैसे जैसे जलवायु में परिवर्तन होने लगा तब इन जानवरों पर बड़ा असर पड़ने लगा।

फिर एक दिन धरती के तापमान के बढ़ने के चलते यह विशालकाय जानवर हमेशा के लिए विलुप्त हो गए। जिस लिहाज से ग्लोबल वार्मिंग का स्तर बढ़ रहा है उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शायद इतिहास दुबारा दोहराया जाए। कहने का मतलब यह है कि जैसे एक समय में ऊनी गैंडे विलुप्त हुए। ठीक वैसे ही आज कई जानवरों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। सिर्फ जानवर ही नहीं बल्कि इंसान भी आज जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहे हैं।

आज यह पृथ्वी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। ग्रीनहाउस गैस ग्लोबल वार्मिंग का सबसे मुख्य कारण बना हुआ है। 18वी शताब्दी से पहले तक तो कोई जानता ही नहीं था कि ग्रीनहाउस गैस और ग्लोबल वार्मिंग होता क्या है। पर 18वी शताब्दी के बाद से ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी होती गई। आज समय से पहले सर्दी और गर्मी हो जाती है। आज धरती की स्तिथि बहुत खराब हो चली है। अब हमें समय के रहते हुए जागना होगा। अगर हम ही नहीं जागे तो हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों को कैसे संरक्षित कर पाएंगे।

ग्लोबल वार्मिंग पर 10 लाइनें

1) ग्लोबल वार्मिंग के चलते धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है।

2) ग्लोबल वार्मिंग हमारी धरती के लिए बहुत हानिकारक है।

3) इसके चलते दुनिया में प्राकृतिक आपदाएं और बीमारियां बढ़ती जा रही है।

4) हम सभी मानव जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है।

5) ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु और पर्यावरण को समान रूप से नुकसान पहुंचता है।

6) आज दुनियाभर में ग्लेशियर पिघल रहे हैं और इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।

7) आज पेड़-पौधों को लगातार काटा जा रहा है।

8) कृषि गतिविधियां भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है।

9) इसी के चलते आज बहुत सी जानवरों की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है।

10) कार्बन-डाइऑक्साइड गैस ग्लोबल वार्मिंग के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।

निष्कर्ष

तो आज के इस निबंध के माध्यम से हमने यह सीखा कि आखिर ग्लोबल वार्मिंग क्या होती है। इस निबंध में हमने यह जाना कि ग्लोबल वार्मिंग फैलने के कारण क्या है। हमने यह भी जाना कि ग्लोबल वार्मिंग को फैलने से हम कैसे रोक सकते हैं। आज समय की यह मांग है कि हम अपनी पृथ्वी के बारे में गंभीरता से सोचे। हम मनुष्य ही धरती के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं। ऐसा करके हम खुद चलाकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं।

हमारे द्वारा किए गए बुरे कामों का फल बेचारे बेजुबान जानवरों को उठाना पड़ रहा है। आज आए दिन कोई ना कोई प्राकृतिक आपदाएं हो रही है। जलवायु परिवर्तन ने धरती का सारा खेल बिगाड़ के रखा है। बहुत से पर्यावरणविद यह दावा कर रहे हैं कि वह जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से काम चर रहे हैं। पर ऐसा नहीं है। हम सभी को अपने पर्यावरण के हित में आगे आना होगा। अगर हम मनुष्य कोई कदम नहीं उठाएंगे तो आगे वाले समय में परिणाम बहुत गंभीर होंगें। हम आशा करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह निबंध पसंद आया होगा।

FAQs
Q1. ग्लोबल वार्मिंग क्या होता है?

A1. जब धरती का तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगे तो समझ लिजिए कि यह ग्लोबल वार्मिंग होने का संकेत है। ग्लोबल वार्मिंग एक प्रकार की ऐसी प्रकिया है जिसमें धरती का तापमान बढ़ता चला जाता है।

Q2. ग्लोबल वार्मिंग होने के कारण क्या है?

A2. ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख कारण है –
1) वाहनों के इस्तेमाल के चलते
2) पेड़ और वन की कटाई
3) जनसंख्या में वृद्धि
4) कृषि गतिविधियों के कारण

Q3. ग्लोबल वार्मिंग का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

A3. ग्लोबल वार्मिंग का हमारे जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। वह धरती, जानवर और इंसानों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। आज ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के चलते प्राकृतिक आपदाएं सामान्य हो चली है।

Q4. दुनिया में सबसे जहरीली गैस कौन सी है?

A4. दुनिया में सबसे जहरीली गैस कार्बन मोनोऑक्साइड है। इस गैस की कोई गंध नहीं होती और कोई स्वाद नहीं होता।

Q5. हमारी पृथ्वी कितनी गहरी है?

A5. हमारी पृथ्वी 6371 किलोमीटर गहरी है।

Q6. पांच प्रकार की ग्रीनहाउस गैस कौन सी होती है?

1) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
2) मीथेन (CH4)
3) नाइट्रस ऑक्साइड (N2O)
4) फ्लोरिनेटेड गैस
5) जल वाष्प

Q7. पृथ्वी का केंद्र कहां पर स्थित है?

A7. पृथ्वी का केंद्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर में स्थित है। पृथ्वी के केंद्र में एक ठोस लोहे का आंतरिक कोर मौजूद होता है।

Q8. सबसे गर्म गैस कौन सी है?

A8. कोई मानता है कि सबसे गर्म गैस हीलियम गैस है। तो बहुत से लोग यह भी मानते हैं कि आर्गन सबसे गर्म गैस है।

अन्य विषयों पर निबंधयहाँ से पढ़ें

Leave a Reply