मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध (Essay on my Favourite book in Hindi) – meri priya pustak par nibandh

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Ekta Ranga

मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध- मुझे बचपन से ही पढ़ने और लिखने का बहुत शौक था। मुझे जब भी समय मिलता था मैं किताबें पढ़ने हमारी शहर की लाइब्रेरी में पहुंच जाती थी। फिर धीरे धीरे इसी शौक ने मुझे घर में भी एक लाइब्रेरी बनवाने का मौका दे दिया। और फिर हुआ यह कि मेरे घर की लाइब्रेरी में किताबों का भंडार बढ़ता गया। मैं तो यही मानती हूं कि एक इंसान को पढ़ने लिखने का शौक होना चाहिए। किताबों से हमें असली ज्ञान मिलता है। तो आइए आज हम पढ़ते हैं meri priya pustak par nibandh hindi mein।

मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध (Essay on my Favourite book in Hindi)

किताबों के बिना ज्ञान कहां? किताबें हैं तो ज्ञान है। और इसी से हमारा संसार है। किताबों को जितनी गहनता से पढ़ा जाए वह उतना ही आपको फायदा पहुंचाती है। सही रूप से चुनी हुई किताबें हमारे ज्ञान का दायरा बढ़ाती है। वह हमें सही मार्ग दिखाती है। किताबों को हमें अपना दोस्त समझना चाहिए। दुनिया में ऐसे कई महान लोग होते हैं जिन्हें पुस्तकों से बढ़कर और कोई भी चीज प्रिय नहीं होती है। बहुत लोगों से यह सुना है कि पुस्तके उन्हें सकारात्मक उर्जा प्रदान करती है। मुझे भी कभी से पुस्तकों से अत्यंत प्रेम रहा है। मुझे हर तरह की किताबें पढ़ने का शौक है परंतु जितना लगाव उपन्यास से है उतना किसी और से नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुझे दूसरी किताबें पढ़ने अच्छी ही लगती है। परंत जो मजा उपन्यास पढ़कर आता है वह किसी और किताब से नहीं मिलता। तो आज हम मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध हिंदी में (essay on my favourite book in hindi) पढ़ेंगे।

प्रस्तावना

पुस्तकों से हमारा परिचय बचपन से ही हो जाता है। पुस्तकें हमारी सच्ची दोस्त होती है। किताबें ज्ञान की गंगा की तरह होती है। हम उससे जितना ज्ञान प्राप्त करते हैं वह भी हमारे लिए कम पड़ जाता है। पुस्तकों से हमें हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है। पुस्तकों को हम अपने सच्चे दोस्त की तरह मान सकते हैं। कोई हमारा दोस्त हो या ना हो। परंतु किताबों के साथ हमें हर समय दोस्ती करके रखनी चाहिए।

हम जब से स्कूल जाना शुरू करते हैं तब से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक यह हमारी दोस्त रहती है। सभी लोग अलग-अलग तरह की किताबों को पढ़ना पसंद करते हैं। किसी को धार्मिक किताबें पसंद होती है तो कोई उपन्यास प्रेमी होता है। किताबों को हर तरह की शैली में लिखा जाता है। जैसे उपन्यास, गैर कल्पना, और धार्मिक किताबें आदि। किताबों से सच्ची दोस्ती करना अति आवश्यक होता है। किताबें हमें जिंदादिल इंसान बनाती है।

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हमारे जीवन में पुस्तकों का महत्व

स्कूल के दिनों में मेरी क्लास में एक अनोखी लड़की थी। वह हमेशा अपना एक ही दुख सुनाया करती थी कि उसकी कोई बेस्ट फ्रेंड क्यों नहीं है। हम सब उसे समझाते कि हम सभी उसकी बेस्ट फ्रेंड्स हैं। परंतु वह हमारी बातों को अनसुना कर देती थी। फिर एक दिन मेरी उससे दोस्ती हो ही गई। परंतु ना जाने क्यों वह अभी भी असंतुष्ट थी। उसकी इसी असंतुष्टी के चलते मैं उसे अपनी दादी के पास ले गई। मेरी दादी बहुत समझदार थी। उसने अपने मन की सारी बात मेरी दादी के सामने रख दी। मेरी दादी ने उसे समझाया कि बेस्ट फ्रेंड जैसे कोई चीज मायने नहीं रखती। दादी ने उसे यह भी समझाया कि पुस्तकों से बढ़िया आपका कोई भी दोस्त नहीं हो सकता। उस लड़की को मेरी दादी की बात आखिरकार समझ में आ गई। उस दिन से लेकर आज तक वह हकीकत में पुस्तकों को ही अपना दोस्त मानती है।

यह बात एकदम सौ फीसदी सही है कि मनुष्य का सच्चा दोस्त तो केवल पुस्तक ही हो सकती है। पुस्तक को इंसान का सच्चा दोस्त माना जाता है। पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती है। बिना पुस्तक के हम अपने जीवन को अधूरा मान सकते हैं। पुस्तक चाहे धार्मिक हो या कविताओं का संग्रह, सभी अपनी अपनी जगह पर सर्वश्रेष्ठ होती है। इस दुनिया में जितने भी महान लोग हुए है वह सभी इसी बात पर ज्यादा जोर देते थे कि सभी प्रकार की पुस्तकें हमारे ज्ञान के दायरे को बढ़ाती है। जीवन में जब कभी भी निराशा छा जाती है तो उस मुश्किल घड़ी में आध्यात्मिक किताबें हमारे जीवन से अंधकार के बादलों को हटा देती है। यह हमारे जीवन को फूलों की खुशबू की तरह महका देते हैं।

पुस्तक का जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

हम पुस्तकों के बिना अधूरे माने जाते हैं। पुस्तकें हमें अनेक प्रकार की नई चीजें सीखाती है। हमारे देश में कहीं कहीं यह माना जाता है कि स्कूल की किताबों के अलावा हमें और कोई किताब को पढ़ने की जरूरत ही क्या है। हम दिन से रात तक केवल स्कूली किताबें पढ़ते हैं। और जब हम स्कूल से निकलकर काॅलेज में दाखिला लेते हैं तब भी हमारे जीवन में काॅलेज और प्रतियोगी परीक्षा की किताबों का दौर चलता रहता है। लेकिन विदेशों में बात यहां से विपरीत है। विदेशों में लोग किताबों को बड़े ही चाव से पढ़ते हैं। लोग उपन्यास और अन्य तरह की किताबों में दिलचस्पी रखते हैं। हमारे यहां पर केवल किताबी ज्ञान पर ज्यादा जोर दिया जाता है। पर पुस्तकों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है।

इस दुनिया के महान से महान लोग भी यह मानते हैं कि पुस्तक हमारे जीवन में सफलता के रास्तें खोल सकता है। अच्छी और ज्ञानवर्धक किताबें हमें जीवन के सभी मुश्किलों से उबार देती है। हर प्रकार की किताबों का अपना अलग महत्व होता है। जैसे उपन्यास हमें कल्पना की दुनिया में ले जाती है। स्कूली किताबें हमें शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाती है। और ज्ञानवर्धक किताबें हमारा खूब सारा ज्ञान बढ़ाती है। हमारी धार्मिक किताबें हमें आध्यात्मिकता का रास्ता दिखाती है। इन धार्मिक किताबों में सबसे बेहतरीन किताबें भागवत गीता और रामायण को माना जाता है। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि अच्छी पुस्तकें हमारे शरीर में उत्साह का संचार पैदा करती है। यह हमें हर क्षेत्र में माहिर बना देती है। चाहे हमारा कोई सच्चा दोस्त हो या ना हो परंतु फिर भी पुस्तकें जीवनभर के लिए सच्चा दोस्त साबित हो सकती है।

पुस्तक पढ़ने के लाभ क्या है?

पुस्तक हमारे ज्ञान के विस्तार को बढ़ा देती है। अच्छी पुस्तकें हमारे स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए भी अति उत्तम होती है। तो आइए हम पुस्तक पढ़ने से मिलने वाले लाभ को जानते हैं।

1) पुस्तक हमारी एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है- जब भी हम अपने जीवन को लेकर उलझन में चल रहे होते हैं तब हमें सभी से यही सुनने को मिलता है कि आप अपनी एकाग्रता (concentration) को बढ़ाइए। हमारे जीवन में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है कि हम अपनी एकाग्रता को बढ़ाए। क्या आपको पता है कि रोजाना अनेक प्रकार की पुस्तकें पढ़ने से इंसान की एकाग्रता शक्ति बहुत तेज होती है।

2) किताबों से हमें जानकारी मिलती है- अच्छी और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ने पर हमें दुनियाभर की अनेक जानकारी मिल जाती है। यह बात एकदम सही है कि हर प्रकार की जानकारी हमें एक ही दायरे में रहकर नहीं मिल सकती है। जब हम अनेको प्रकार की पुस्तक पढ़ते हैं तो हमें हर तरह की जानकारी से रूबरू होने का मौका मिलता है।

3) पुस्तकें हमारी सच्ची दोस्त होती है- इस दुनिया में भले ही आपके कितने ही दोस्त क्यों ना हो पर एक ऐसा खास दोस्त भी होता है जो जीवनभर हमारा साथ नहीं छोड़ता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं किताबों की। किताबें हमारी सच्ची दोस्त होती है। उनमें इतनी ताकत होती है कि वह हमें मुश्किल घड़ी से बाहर भी निकाल सकती है।

4) किताबें याददाश्त बढ़ाने में मदद करती है- क्या आपको पता है कि किताबें याददाश्त बढ़ाने में बहुत सहायक होती है। किताबें हमारी मेमोरी तेज करने में बहुत मददगार होती है। जब हम खूब सारी किताबें पढ़ने लग जाते हैं तो ऐसा करने से हमारी याददाश्त बहुत तेज होने लग जाती है।

5) अच्छी नींद का राज किताबें भी होती हैं – यह बात सुनकर आपको थोड़ा अलग लग रहा होगा। परंतु ऐसा सच में होता है। क्योंकि जब हम पूरे दिन से थके हारे हुए घर पर आकर किताब पढ़ते हैं तो यह हमें अच्छी नींद लेने में मदद करती है।

6) किताबें हमें सकारात्मक बनाने में मदद करती है – किताबें एक प्रकार का ऐसा अनमोल धन है जो हमें हर रूप में फायदा पहुंचाती है। अगर हमें अपने जीवन में सकारात्मकता चाहिए तो हमें किताबों को अपने जीवन में शामिल करना होगा।

किताब पर गुलजार साहब की कविता

किताबें झाँकती हैं बंद अलमारी के शीशों से 

बड़ी हसरत से तकती हैं 

महीनों अब मुलाक़ातें नहीं होतीं 

जो शामें उन की सोहबत में कटा करती थीं, अब अक्सर

गुज़र जाती हैं कंप्यूटर के पर्दों पर

बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है 

जो क़द्रें वो सुनाती थीं

कि जिन के सेल कभी मरते नहीं थे

 वो क़द्रें अब नज़र आती नहीं घर में

 जो रिश्ते वो सुनाती थीं 

वो सारे उधड़े उधड़े हैं 

कोई सफ़्हा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है 

कई लफ़्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं 

बिना पत्तों के सूखे तुंड लगते हैं वो सब अल्फ़ाज़

 जिन पर अब कोई मानी नहीं उगते 

बहुत सी इस्तेलाहें हैं 

जो मट्टी के सकोरों की तरह बिखरी पड़ी हैं 

गिलासों ने उन्हें मतरूक कर डाला

 ज़बाँ पर ज़ाइक़ा आता था जो एक सफ़्हे पलटने का

 अब उँगली क्लिक करने से बस इक झपकी गुज़रती है

 बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है पर्दे पर 

किताबों से जो ज़ाती राब्ता था कट गया है 

कभी सीने पे रख के लेट जाते थे 

कभी गोदी में लेते थे

 कभी घुटनों को अपने रेहल की सूरत बना कर

 नीम सज्दे में पढ़ा करते थे छूते थे जबीं से 

वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी

 मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल और महके हुए रुकए 

किताबें माँगने गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे 

उन का क्या होगा

वो जाने अब नहीं होंगे! 

-गुलजार

किताबों पर शायरी

काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब केदीवाना बेपढ़े, लिखे मशहूर हो गया

बशीर बद्र

किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैंअल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश

अज्ञात

जिसे पढ़ते तो याद आता था तेरा फूल सा चेहराहमारी सब किताबों में इक ऐसा बाब रहता था

असद बदायुनी

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबेंइक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं

जाँ निसार अख़्तर

वही फ़िराक़ की बातें वही हिकायत-ए-वस्लनई किताब का एक इक वरक़ पुराना था

इफ़्तिख़ार आरिफ़

छुपी हैं अनगिनत चिंगारियाँ लफ़्ज़ों के दामन मेंज़रा पढ़ना ग़ज़ल की ये किताब आहिस्ता आहिस्ता

प्रेम भण्डारी

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखोज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

निदा फ़ाज़ली

किधर से बर्क़ चमकती है देखें ऐ वाइज़मैं अपना जाम उठाता हूँ तू किताब उठा

जिगर मुरादाबादी

फ़लसफ़े सारे किताबों में उलझ कर रह गएदर्सगाहों में निसाबों की थकन बाक़ी रही

नसीर अहमद नासिर

वाक़िये तो अनगिनत हैं मेरी ज़िंदग़ी के सोच रही हूं किताब लिखूं या हिसाब लिखूं

अज्ञात

भुला दीं हम ने किताबें कि उस परीरू केकिताबी चेहरे के आगे किताब है क्या चीज़

नज़ीर अकबराबादी 

निष्कर्ष

तो आज के इस पोस्ट के जरिए हमने मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध पढ़ा। हमने यह पोस्ट बेहद ही सरल भाषा में लिखने की पूरी कोशिश की है। आज हमने यह जाना कि पुस्तक हमारे लिए क्यों और कितनी महत्वपूर्ण होती है। हमने यह भी जाना कि हमें किताबें पढ़ने से किस प्रकार का लाभ मिलता है। आज के इस दौर में किताबें पढ़ने से हम बहुत प्रकार के लाभ उठा सकते हैं। किताबें हमारी गुरू भी हो सकती है और हमारी सच्ची दोस्त भी। हमें पुस्तकों से ज्ञान मिल सकता है। यह हमें दूसरों से व्यवहार करना भी सीखा सकती है। यह हमारे जीवन को सही दिशा देती है और हमें बुद्धिमान भी यही बनाती है। किताबें हमारे जीवन से अंधकार को हटाकर हमें प्रकाश की ओर ले जाती है। अगर हमारे जीवन में पुस्तकें नहीं है तो समझो हमारा जीवन अधूरा है। हम यह उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह निबंध बहुत पसंद आया होगा।

मेरी प्रिय पुस्तक पर 10 लाइनें

1) पुस्तकें हमारे जीवन की सबसे अनमोल चीज होती हैं।

2) पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती है।

3) पुस्तकें पढ़ने से हमारे अंदर आत्मविश्वास पैदा होता है।

4 ) पुस्तकों कई प्रकार की होती है।

5) किताबों का अध्ययन करने से हमारी याददाश्त बहुत तेज होती है।

6) हमें नियमित रूप से किताबें पढ़ने चाहिए।

7) मेरी प्रिय पुस्तक भागवत गीता है।

8) किताबें आपके अंदर की रचनात्मकता को जगा देती हैं।

9) महान व्यक्ति हमें किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

10) किताबें पढ़ने के बाद हम एक नई कल्पना की दुनिया में पहुंच जाते हैं।

FAQ’S

Q1. हमारे जीवन में पुस्तकों का क्या महत्व है?

A1. पुस्तकें पढ़ने से हमें कई तरह के फायदे मिलते हैं। यह हमारे जीवन की सबसे अनमोल चीज होती है। नई नई पुस्तकें पढ़ने से हमें एक अलग तरह का अनुभव मिलता है। पुस्तक हमें सही राह पर चलना सीखाती है। बिना पुस्तकों के हमारा जीवन अधूरा है।

Q2. किताबें पढ़ने से दिमाग को क्या फायदा मिलता है?

A2. किताबें पढ़ने से हमारा दिमाग बुद्धिमान बनता है। यह हमें एक्टिव रखने में बहुत मदद करती है। जो इंसान हर रोज किताबों का अध्ययन करता है वह दूसरों के मुकाबले चीजों को ज्यादा याद रख सकता है।

Q3. पुस्तक लिखने से क्या फायदा होता है?

A3. हम में से बहुत से लोगों को यह लगता है कि हम शायद पुस्तक नहीं लिख सकते हैं। परंतु ऐसा है नहीं। पुस्तक पढ़ने से हमारे अंदर कल्पनाओं की उपज होने लगती है। जब हम कोई नए किरदार या कहानी को पन्नों पर उतारते हैं तो हमें अंदर से अच्छा महसूस होता है।

Q4. पुस्तक पढ़ने से हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

A4. इस दुनिया के महान से महान लोग भी यह मानते हैं कि पुस्तक हमारे जीवन में सफलता के रास्तें खोल सकता है। अच्छी और ज्ञानवर्धक किताबें हमें जीवन के सभी मुश्किलों से उबार देती है। यह हमें सकारात्मक बनाने में मदद करती है।

Q5. पुस्तक पढ़ने के क्या फायदे हैं?

A5. 1) पुस्तक हमारी एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है।
2 ) किताबों से हमें जानकारी मिलती है।
3 ) किताबें हमारी सच्ची दोस्त की तरह होती है।
4 ) यह हमें जीवन में नया अनुभव सीखाती है।
5 ) किताबें हमें अच्छी नींद लेने में सहायता करती है।
6 ) अच्छी किताबें हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है।

Q6. क्या एक अच्छी पुस्तक हमारी दोस्त हो सकती है?

A6. जी हां, एक अच्छी पुस्तक हमारी दोस्त हो सकती है। वह हमें सही और गलत रास्ते का मार्ग दिखाती है। वह हमारी मुश्किल से मुश्किल घड़ी में भी मजबूत सहारे की तरह खड़ी रहती है। हमें हमें कभी भी अकेला महसूस नहीं होने देती है।

Q7. इस दुनिया की सबसे पहली किताब कौन सी मानी जाती है?

A7. इस दुनिया की सबसे पहली किताब हमारी धार्मिक ग्रंथ ‘ऋग्वेद’ को मानी जाती है। गृत्समद, विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, भारद्वाज, वशिष्ठ आदि इस ग्रंथ के रचियता माने जाते हैं।

Q8. मेरे प्रिय लेखकों का नाम क्या है?

A8. मेरे प्रिय लेखकों का नाम है – मुंशी प्रेमचंद, रबीन्द्रनाथ ठाकुर, रस्किन बॉन्ड, मैथिलीशरण गुप्त, अमीर खुसरो आदि।

Q9. रामायण के रचियता किसको माना जाता है?

A9. रामायण के रचियता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि को माना जाता है।

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