आदर्श विद्यार्थी पर निबंध (Essay on Ideal student in Hindi)

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Ekta Ranga

बचपन में स्कूल को लेकर मन में डर बैठा रहता था। ऐसा लगता था कि अगर होमवर्क पूरा नहीं हुआ तो मेरी टीचर मुझे कितना ज्यादा डांटेगी। क्लास में जब भी बच्चों को अच्छी रैंक लाते हुए देखती तो उस समय भी मेरा मन उदास हो जाता था कि मैं आदर्श विद्यार्थी (adarsh vidyarthi) क्यों नहीं हूं? फिर एक दिन मेरी टीचर ने मुझे समझाया कि मुझे उदास नहीं होना चाहिए। हर कोई छात्र में अलग अलग खूबियां होती है। उन्होंने मुझे यह भी कहा कि माना कि मैं अच्छी रैंक को छोड़कर बाकी सभी गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेती हूं। तो आज का हमारा विषय है आदर्श विद्यार्थी पर हिंदी में निबंध (Essay on Ideal student in Hindi)।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध (Essay on Ideal student in Hindi)

जब एक बालक जन्म लेता है तो उसके जन्म के साथ साथ उसके लिए भविष्य की जिम्मेदारियों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। एक बालक के जीवन में सबसे पहली बड़ी जिम्मेदारी विद्यार्थी के रूप में आती है। जब एक बच्चा शिशु से बालक की ओर बढ़ता है तो उसे एक आदर्श विद्यार्थी (adarsh vidyarthi) के रूप में स्कूल भेजा जाता है। सभी माता पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करे। तो आज हमने तैयार किया है आदर्श विद्यार्थी पर निबंध (Ideal student essay in Hindi)। तो आइए पढ़ते हैं (adarsh vidyarthi nibandh in Hindi) आदर्श विद्यार्थी पर निबंध हिंदी में।

प्रस्तावना

आज का यह युग भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा वाला बन चला है। आज दुनिया के हर एक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है। जहां देखो वहां लोग एक दूसरे को पछाड़ने में लगे हैं। 21वीं शताब्दी का यह दौर ही ऐसा बन पड़ा है। हर एक मनुष्य के मन में हर पल हलचल बनी रहती है। एक मनुष्य अपने जीवन में सबसे अहम भूमिका में तब आता है जब वह एक विद्यार्थी बनता है। एक विद्यार्थी का जीवन अलग ही होता है। स्कूल में सब उम्मीद करते हैं कि एक छात्र बहुत ही मेहनती और अनुशासन में रहने वाला हो। बचपन से ही माता-पिता यह उम्मीद करना शुरू कर देते हैं कि उनका बच्चा दूसरे बच्चों से दस गुना अच्छा प्रदर्शन करे।

एक विद्यार्थी का आदर्श होना बहुत ही जरूरी है। अगर छात्र आदर्श ना होकर अनुशासनहीनता अपनाए तो उस छात्र का भविष्य अंधकार में चला जाता है। आदर्श शब्द का अर्थ क्या होता है? दरअसल आदर्श शब्द का अर्थ है हर प्रकार की चीजों में परिपूर्ण होना। एक विद्यार्थी का भी आदर्श होना बहुत जरूरी है। जब एक विद्यार्थी आदर्श होता है तो वह अपनी कमियों को बाहर लाकर अच्छाई के गुण को अपनाता है। एक आदर्श विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में कामयाब रहता है। वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नहीं घबराता है। वह निडर होकर अपने सारे काम करता है। आज के समय में एक छात्र को आदर्श बनकर रहना बहुत ही जरूरी है।

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एक आदर्श विद्यार्थी कौन होता है?

मनुष्य के जीवन में जितना महत्व शिक्षा का है उतना महत्व और किसी चीज का नहीं है। बिना शिक्षा के एक मनुष्य अधूरा ही माना जाता है। इसलिए यह अति आवश्यक है कि वह उत्तम शिक्षा ग्रहण करे। और यह उचित शिक्षा उस मनुष्य को तब ही प्राप्त हो सकती है जब वह पढ़ने के लिए स्कूल जाए। स्कूल में जो शिक्षा प्राप्त होती है उससे एक इंसान हर प्रकार से परिपूर्ण बन जाता है। विद्यालय एक छात्र को हर प्रकार के आदर्शों से परिचित करवाता है। तो अब हम जानते हैं कि एक आदर्श विद्यार्थी कौन होता है?

एक आदर्श छात्र वह है जो अपनी हर प्रकार की खामियों को दूर करने की कोशिश करता है। वह अपने आप को अंदर से निखारने में विश्वास रखता है। आदर्श विद्यार्थी का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि वह केवल किताबी ज्ञान पाकर ही सब कुछ हासिल करे। उसको चाहिए कि वह हर एक चीज का असली ज्ञान प्राप्त करे। एक आदर्श छात्र अपने बुरे गुणों को दूर करके सही मार्ग की ओर प्रस्थान करता है। वह अपने गुरु के कहे सारे काम करता है। वह स्कूल में होने वाली किसी भी गतिविधियों में भाग लेने से चुकता नहीं।

आदर्श विद्यार्थी के गुण

अनुशासन- एक विद्यार्थी का सबसे खास गुण होता है अनुशासन के साथ जीवन को जीना। जब तक एक छात्र अनुशासन का पालन नहीं करता तब तक उसका उत्थान होना संभव नहीं माना जाता है। हर एक छात्र को अनुशासन का सख्ती से पालन करना चाहिए।

मेहनती- एक आदर्श विद्यार्थी इस बात का भी बहुत अच्छे से ख्याल रखता है कि वह अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए कितनी मेहनत कर रहा है। मेहनती छात्र को दुनिया में कोई भी चीज़ कठिन नहीं लगती है। स्कूल में उसको जो कुछ भी पढ़ाया जाता है वह उसे अच्छे से समझकर अच्छे अंक लाने के लिए कड़ी मेहनत करता है।

समय का आदर करने वाला– जो लोग अपने जीवन में समय का सदुपयोग करते हैं वह लोग ही दरअसल सफल हो सकते हैं। जीवन में समय का पाबंद होना अति आवश्यक है। इसके बिना जीवन असफल माना जाता है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाला- एक आदर्श छात्र स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जोर देता है। वह सही समय पर खाता है और सही समय पर सोता है। वह खाने पीने में भी नखरे नहीं दिखाता है। उसकी डाइट में वह सभी चीजें शामिल होती है जिससे उसके शरीर को ताकत मिले। उसके सोने का समय भी निर्धारित होता है। वह 7-8 घंटे की नींद लेता है। वह स्वस्थ जीवनशैली से कभी भी खिलवाड़ नहीं करता है।

भरोसेमंद- एक आदर्श छात्र हमेशा ही अपने सहपाठी और गुरुओं के लिए बहुत भरोसेमंद होते हैं। इस प्रकार के छात्रों पर सभी जने आंखें मूंदकर भरोसा करते हैं। आदर्श विद्यार्थी कभी भी कोई भी प्रकार के काम करने से घबराते नहीं है।

आदर्श विद्यार्थी का लक्ष्य क्या होता है?

जब हम विद्यार्थी जीवन में अपना कदम रखते हैं तो वह पड़ाव बहुत ही अहम होता है। जब कोई माता-पिता अपने बच्चे का दाखिला पहली बार स्कूल में करवाते हैं तो उन्हें अपने बच्चे से बहुत उम्मीदें होती है। वह अपने बच्चे के सुनहरा भविष्य का सपना संजोए रखते हैं। केवल माता-पिता ही नहीं बल्कि एक छात्र के गुरु को भी उनसे बड़ी उम्मीदें होती है। इसलिए एक विद्यार्थी का यह फर्ज बनता है कि वह अपने बड़ों के मान सम्मान में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दे। एक आदर्श छात्र वही है जो स्कूल में पूरा मन लगाकर पढ़ाई करे।

यह उनके सुनहरे भविष्य के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि आज के समय में बहुत ऐसे बच्चे हैं जो बिगड़ते ही जा रहे हैं। उन्हें कई गंदी प्रकार की लत लगती जा रही है जैसे कि शराब- सिगरेट पीना, जुआ खेलना आदि। ऐसे में एक सभ्य विद्यार्थी को यह ध्यान में रखना पड़ता है कि वह कोई भी प्रकार की गंदी आदतों के शिकार ना बने। उन्हें अपना उचित लक्ष्य पता होना चाहिए। वह केवल अपनी पढ़ाई पर ही पूर्ण रूप से फोकस करें। क्योंकि ऐसा करने पर ही वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाएंगे। जब वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे तो ऐसे में वह डॉक्टर और इंजीनियर बनकर इस देश और अपने बड़ों का नाम रोशन कर पाएंगे।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध 100 शब्दों में

एक आदर्श छात्र से हम सभी यह उम्मीद करते हैं कि एक आदर्श विद्यार्थी को सही मार्ग का पालन करना चाहिए। छात्र जीवन एक ऐसा अहम पड़ाव होता है जब हमें बहुत सी चीजों का ज्ञान और अनुभव होता है। विद्यार्थी जीवन के चलते हम पर किसी भी प्रकार की कुसंगति का असर नहीं पड़ना चाहिए। उसे हमेशा यही कोशिश करनी चाहिए कि कैसे वह दूसरे छात्रों के लिए भी एक मिसाल बने। जब एक छात्र आदर्श विद्यार्थी की तरह पेश आता है तो वह हर किसी का चहेता बन जाता है।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध 200 शब्दों में

जब एक इंसान एक छात्र के रूप में अपने जीवन की शुरुआत करता है तो उसे कई सारी चीजों के बारे में सोचना पड़ता है। उसके माता-पिता उसे स्कूल में दाखिला दिलवाने के बाद यही समझाते हैं कि उसे कभी भी कोई भी तरह की परिस्तिथियों में हारना नहीं है। एक आदर्श विद्यार्थी अपने स्कूली जीवन में हर तरह की गतिविधियों में आनंदपूर्वक शामिल होता है। उसे स्कूल द्वारा दी गई कोई भी गतिविधि बोझ नहीं लगती है।

आज के समय में जहां छात्र गला काट प्रतिस्पर्धा में लगे हैं वहां कोई ऐसे छात्र भी होते हैं जो अपने जीवन को मूल्यों के साथ जीते हैं। ऐसे छात्र आदर्श विद्यार्थियों की श्रेणी में आते हैं। वह अपने जीवन में सिद्धांतों को लेकर चलते हैं। स्कूल में होने वाली सारी तरह की प्रतियोगिताओं में वह बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। ऐसे आदर्श विद्यार्थियों को देखकर दूसरे बच्चों के मन में भी उनके प्रति आदर और सम्मान का भाव पैदा हो जाता है। वह अपने कक्षा और पूरी स्कूल में सबके चहेते बन जाते हैं। आदर्श विद्यार्थी बनकर एक छात्र दूसरों के लिए मिसाल कायम करता है। वह अपने सभी साथी लोगों के उत्थान के बारे में सोचता है।

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध 500 शब्दों में

अगर हमें कोई बड़ी चीज हासिल करनी है तो हमें यह चाहिए कि हम उसे पाने के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करें। हमें अपना लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है जब हम उसे पाने के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करें। विद्यार्थी जीवन में भी यही चीज सबसे ज्यादा मायने रखती है। हम सभी अपने विद्यार्थी जीवन में यही सोचते हैं कि कैसे हमें एक आदर्श विद्यार्थी बनने का मौका हासिल हो। इस स्थान तक पहुंचने के लिए हमें बहुत कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इस स्थान को हासिल करने के लिए हमें बहुत सी चीजों का पालन करना पड़ता है जैसे ईमानदारी, सकारात्मकता, उत्सुकता, मेहनती और लक्ष्य निर्धारण आदि।

अगर हम यह सोचते हैं कि कैसे कोई छात्र इतना अनुशासित और आदर्श बन जाता है तो यह कोई मुश्किल काम नहीं है। दरअसल कोई भी मनुष्य पैदा होते ही सारे गुण नहीं सीखता है। उसे आदर्श छात्र बनने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। उसे कक्षा में हमेशा सचेत रहना पड़ता है। उसे स्कूल के द्वारा दिए गए हर कार्यों को उचित समय पर पूरा करना पड़ता है। उसे अपने गुरु और क्लास के बच्चों के साथ अच्छा तालमेल बैठाना पड़ता है। यह सारे गुण अपनाकर ही वह एक आदर्श विद्यार्थी की श्रेणी में आ सकता है। आदर्श छात्र अपने माता-पिता और अपने गुरुओं की आंखों का तारा बन जाता है। समाज में भी उसी की ही वाहवाही होती है।

निष्कर्ष

तो आज के इस निबंध के माध्यम से हमने यह जाना कि असल में आदर्श विद्यार्थी कौन होता है। हमने यह सीखा कि एक अच्छा छात्र बनने के लिए हमें कौन कौन से गुणों की आवश्यकता पड़ती है। बहुत से माता पिता ऐसे भी होते हैं जिन्हें अपने बच्चों में हमेशा ही कोई ना कोई कमी महसूस होती है। वह अपने खुद के बच्चों से संतुष्ट नहीं रहते हैं। वह उनकी तुलना दूसरे लोगों के बच्चों से करने लगते हैं। और जब ऐसा होने लगता है तो एक बच्चे पर नकारात्मक असर पड़ने लगता है। वह हर समय अपने आप को कम आंकता है। ऐसा लंबे समय तक चलने पर एक बच्चा अंदर से पूरी तरह से टूट जाता है। यही चीज आगे चलकर घातक साबित हो सकती है। हो सकता है कि वह बच्चा कोई बड़ा गलत कदम उठा ले। इसलिए यह बहुत ही जरूरी है कि हम अपने बच्चों को समझें ताकि उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके। हम यह आशा करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह निबंध बहुत पसंद आया होगा।

आदर्श विद्यार्थी पर 10 लाइनें

  1. आदर्श विद्यार्थी सभी के लिए एक प्रेरणा होते हैं।
  2. आदर्श विद्यार्थियों को कोई भी चीज़ मुश्किल नहीं लगती है।
  3. इस तरह के विद्यार्थी हमेशा मेहनत करके आगे बढ़ते हैं।
  4. आदर्श विद्यार्थी सदैव दूसरों की मदद करने के लिए आगे खड़े रहते हैं।
  5. इस तरह के छात्र कभी भी झूठ नहीं बोलते हैं।
  6. आदर्श विद्यार्थियों को स्कूल की हर एक गतिविधियों में शामिल होना अच्छा लगता है।
  7. यह छात्र नकारात्मक माहौल से कोसों दूर रहते हैं।
  8. यह अपने जीवन को बहुत ही मूल्यवान समझते हैं और इसलिए यह कभी भी कोई गलत कदम नहीं उठाते हैं।
  9. आदर्श विद्यार्थी स्कूल में होने वाली खेल कूद में हिस्सा लेते हैं।
  10. यह अपने माता-पिता और अपने गुरुओं की आंखों का तारा होते हैं।

आदर्श विद्यार्थी निबंध पर पूछे जाने वाले सवाल FAQ-

Q1. एक आदर्श विद्यार्थी कौन होता है?

A1. एक आदर्श विद्यार्थी हमेशा आम विद्यार्थियों से अलग होता है। वह उन सभी बातों का ख्याल रखता है जितना एक साधारण छात्र नहीं रख सकता है। वह हमेशा अवगुणों को दूर करके सद्गुणों को अपनाता है। वह अपनी कक्षा में हर समय सचेत रहता है। उसके गुरू जो कुछ भी क्लास में पढ़ाते हैं वह उसे जल्दी ही अवशोषित कर लेते हैं। वह मन लगाकर पढ़ाई करते हैं और कक्षा में अव्वल आते हैं।

Q2. एक आदर्श विद्यार्थी के पांच लक्षण कौन कौन से हैं?

A2. आदर्श विद्यार्थी के पांच लक्षण –

1) अनुशासन

2) जिज्ञासा

3) सहायता प्रेमी

4) संयम

5) समय का पाबंद

Q3. एक छात्र कैसे सफल बनता है?

A3. एक सफल छात्र हमेशा ही देश को ताकतवर और प्रगति की ओर ले जाता है। वह एक सुनहरे भविष्य का निर्माण करता है। एक विद्यार्थी तभी सफल बन सकता है जब वह अपने जीवन में हर एक चीज को व्यवस्थित रूप से करे। जैसे कि पढ़ाई के समय वह केवल पढ़ाई पर ही अपना पूरा ध्यान दे। अपने खान पान और सोने जागने के समय को सही वक्त पर पूरा करे।

Q4. एक विद्यार्थी का पहला कर्त्तव्य क्या है?

A4. एक विद्यार्थी का पहला कर्त्तव्य यह है कि वह अपने सभी बड़े जैसे कि माता-पिता और गुरुजन के कहे अनुसार चलें। वह हरसंभव यह ही प्रयास करें कि वह किसी का भी बेवजह ही दिल ना दुखाए। उसे हमेशा ही कक्षा में अव्वल आने के लिए प्रयास करना चाहिए।

Q5. एक छात्र का क्या कर्त्तव्य होता है?

A5. एक छात्र का कर्त्तव्य यह होता है कि वह अपनी पढ़ाई पूरे मन से करे। वह हमेशा अपने माता-पिता और गुरु की आज्ञा करे। वह ऐसा कोई भी काम ना करे जिससे उनके परिजनों और गुरु को कोई भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े। वह इस बात का भी ध्यान रखें कि अपनी क्लास और स्कूल के मान और गौरव को बढ़ाए। एक आदर्श विद्यार्थी हमेशा अपने से कमजोर बच्चों के उत्थान के बारे में सोचें।

Q6. आदर्श छात्र कैसे बनें?

A6. एक आदर्श छात्र हर जगह अपनी मिसाल कायम करता है। वह अपने माता-पिता और अपने गुरुओं का नाम रोशन करता है। वह हमेशा मन लगाकर पढ़ाई करता है। वह अच्छे से अच्छे अंक लाने के लिए कड़ी मेहनत करता है। वह स्कूल में हर प्रकार की गतिविधियों में भाग लेता है। वह स्कूल में अनुशासन के साथ रहता है। वह स्कूल के दूसरे छात्रों के लिए भी एक मिसाल कायम करता है। एक आदर्श छात्र हमेशा अपने से बड़ों की आज्ञा के अनुसार चलते हैं।

Q7. विद्यार्थी का लक्ष्य क्या होना चाहिए?

A7. एक आदर्श विद्यार्थी का यह फर्ज बनता है कि वह अपने बड़ों के मान सम्मान में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दे। एक आदर्श छात्र वही है जो स्कूल में पूरे मन से पढ़ाई करे। यह उनके सुनहरे भविष्य के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि आज के समय में बहुत ऐसे बच्चे हैं जो बिगड़ते ही जा रहे हैं। उन्हें अपना उचित लक्ष्य पता होना चाहिए। वह केवल अपनी पढ़ाई पर ही पूर्ण रूप से फोकस करें।

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