एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान नागरिक शास्त्र अध्याय 4 कानूनों के समझ

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एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान नागरिक शास्त्र अध्याय 4 कानूनों के समझ

छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान कक्षा आठवीं के प्रश्न उत्तर पूरी तरह से मुफ्त है। बता दें कि class 8 samajik vigyan chapter 4 question answer को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के सहायता से बनाया गया हैं।कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान नागरिक शास्त्र अध्याय 4 कानूनों के समझ को सीबीएसई सिलेबस को ध्यान में रखकर बनाया गया हैं। सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-3 class 8 chapter 4 नीचे से देखें।

कक्षा : 8
विषय : सामाजिक विज्ञान (नागरिक शास्त्र –सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-3)

पाठ :-4  कानूनों के समझ
पाठ के बीच में पूछे जाने वाले प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1 – इस किताब में मनमाना शब्द का इस्तेमाल पीछे भी आ चुका है। अध्याय 1 के शब्द संकलन में आप इसका मतलब पढ़ चुके हैं। अब एक कारण बताइए कि आप 1870 के राजद्रोह कानून को मनमाना क्यों मानते हैं। 1870 का राजद्रोह कानून किस प्रकार कानून के शासन का उल्लंघन करता है ?

उत्तर :- एक कारण तो यह है कि औपनिवेशिक कानून मनमानेपन पर आधारित था। दूसरी वजह यह बताई जाती है कि ब्रिटिश भारत में कानूनी मामलों के विकास में भारतीय राष्ट्रवादियों ने अहम भूमिका निभाई थी। 1870 का राजद्रोह एक्ट अंग्रेजी शासन मनमानेपन की मिसाल था। इस कानून में राजद्रोह की परिभाषा बहुत व्यापक थी। इसके मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति ब्रिटिश सरकार का विरोध या आलोचना करता था तो उसे मुकदमा चलाए बिना ही गिरफ़्तार किया जा सकता था। भारतीय राष्ट्रवादी अंग्रेजों द्वारा सत्ता के इस मनमाने इस्तेमाल का विरोध और उसकी आलोचना करते थे। यह कानून, कानून के शासन के विरुद्ध था। इसके अंतर्गत देश का शासन कानून के अनुसार चलाया जाता है ना कि किसी व्यक्ति कि इच्छा के अनुसार। कानून के शासन में सबको सामान समझा जाता है। परन्तु 1870 के राजद्रोह कानून के अंतर्गत अंग्रेजों व भारतीयों में भेदभाव किया जाता था। अतः: 1870 का राजद्रोह कानून, कानून के शासन का उल्लंघन करता है।

प्रश्न 2 – ‘घरेलू हिंसा‘ से आप क्या समझते हैं ? हिंसा की शिकार महिलाओं को नए कानून से कौन से दो मुख्य अधिकार प्राप्त हुए हैं ?

उत्तर :- जब परिवार का कोई पुरुष सदस्य (आमतौर पर पति) घर की किसी औरत (आमतौर पर पत्नी) के साथ मारपीट करता है। उसे चोट पहुँचाता है, या मारपीट अथवा चोट की धमकी देता है तो इसे घरेलू हिंसा कहा जाता है। औरत को यह नुकसान शारीरिक मारपीट या भावनात्मक शोषण के कारण पहुँच सकता है। यह शोषण मौखिक, यौन या फिर आर्थिक शोषण भी हो सकता है। घरेलू हिंसा कानून, 2005 में महिलाओं की सुरक्षा की परिभाषा ने घरेलू‘ शब्द की समझ को और अधिक व्यापक बना दिया है। अब ऐसी महिलाएँ भी घरेलू दायरे का हिस्सा मानी जाएँगी जो हिंसा करने वाले पुरुष के साथ एक ही मकान में ‘ रहती हैं ‘ या ‘ रह चुकी ‘ हैं। उन्हें अपने इलाज व अन्य खर्चो के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।

प्रश्न 3 – क्या आप एक ऐसी प्रक्रिया बता सकते हैं जिसका इस्तेमाल इस कानून की ज़रूरत के बारे में लोगों को अवगत कराने के लिए किया गया हो ?

उत्तर :- यह कानून इतना महत्वपूर्ण क्यों है यह अवगत कराने के लिए हमें भिन्न – भिन्न तरीके अपनाने चाहिेए जैसे :- महिलाओं के लिए ऐसी ऐसी सभा बुलाई जानी चाहिए या कार्यक्रम आयोजित कराने चाहिए जिसमें यह कानून क्या है। कब जरूरत होगी, यह कैसे सहायता करेगा की पूरी जानकारी हो। इसके लिए हमें स्त्रियों को उनके हक़ समझाने चाहिए उन्हें जागरूक करना चाहिए। ऑनलाइन याचिका करनी चाहिए। संघटन बनाने चाहिए।

प्रश्न 4 – उपरोक्त चित्रकथा – पट्ट को पढ़कर बताइए कि लोगों ने कौन से दो तरीकों से संसद पर दबाव बनाया ?

उत्तर :- राष्ट्रीय महिला अयोग जैसे कई महिला संघटनों ने स्थाई समिति को सुझाव दिए, कई सिफारिशें संसद को प्रस्तुत की। कानून और संशोधन के पक्ष में जनसभाएं की। टीवी के माध्यम से वाद–विवाद किए।

प्रश्न 5 – बगल में दिए गए पोस्टर के ‘ बराबरी के रिश्ते हिंसा से मुक्त ‘ वाक्य खंड से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर :- औरतों को अपने हर निर्णयों के बारे में बोलने तथा स्वयं की मर्जी से निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। उनके साथ लिंग, जाति, धर्म, गरीबी के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। घर या बाहर हर जगह उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।

प्रश्न 6 – एक सप्ताह तक अखबार पढ़ें या टेलीविजन पर खबरें देखें और पता लगाएँ कि क्या कोई ऐसा अलोकप्रिय कानून है जिसका भारत या कहीं और के लोग विरोध कर रहे हैं।

उत्तर :- 20 और 22 सितंबर, 2020 को भारत की संसद ने कृषि संबंधी तीन विधेयकों को पारित किया। 27 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद ने इन विधेयकों को मंजूरी दे दी, जिसके बाद ये तीनों क़ानून बन गए। ये तीन कानून थे :-

  • कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सरलीकरण) कानून-2020
  • कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020

इन कानूनों की किसानों को कई प्रकार की चिंता रही है। किसान तीनों क़ानूनों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वे इन क़ानूनों में किसी संशोधन के लिए तैयार नहीं हैं। किसानों की मांग है कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन तीनों क़ानूनों को निरस्त करें। संघर्षों में किसान अपनी मांगों के लिये प्रत्यक्ष तौर पर लड़ते हुए मुख्य शक्ति के रूप में उभरे। किसानों का राजधानी दिल्ली की सीमा पर पंजाब, हरियाणा और कुछ दूसरे राज्य में किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों ने बीते आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया था जिसे करीब दो दर्जन विपक्षी राजनीतिक पार्टियों और विभिन्न किसान संगठनों का समर्थन मिला था। इस प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच कई राउंड की बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। किसान संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों से गृहमंत्री अमित शाह की मुलाक़ात से भी कोई रास्ता नहीं निकला। किसानों ने लम्बा संघर्ष किया। हड़ताल जारी रखी, अपनों को खोया, अपने परिवार से दूर रहें जिसमें एक साल संघर्ष के आंदोलन के बाद किसान आंदोलन का मकसद सफल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने तीनों कृषि कानून को वापिस ले लिया लेकिन इसे संसद के शीतकालीन सत्र में अमलीजामा पहनाया जाएगा।

अभ्यास :-

प्रश्न 1 – ‘ कानून का शासन ‘ पद से आप क्या समझते हैं ? अपने शब्दों में लिखिए। अपना जवाब देते हुए कानून के उल्लंघन का कोई वास्तविक या काल्पनिक उदाहरण दीजिए।

उत्तर :- कानून के शासन का मतलब है कि सभी कानून देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। कानून से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं है। चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या धन्नासेठ हो और यहाँ तक कि राष्ट्रपति ही क्यों न हो। किसी भी अपराध या कानून के उल्लंघन की एक निश्चित सज़ा होती है। सज़ा तक पहुँचने की भी एक तय प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति का अपराध साबित किया जाता है। देश में कानून ही सर्वोच्च है। देश का शासन कानूनानुसार चलाया जाता है न कि किसी व्यक्तिगत इच्छा के अनुसार।

प्रश्न 2 – इतिहासकार इस दावे को गलत ठहराते हैं कि भारत में कानून का शासन अंग्रेज़ों ने शुरू किया था। इसके कारणों में से दो कारण बताइए।

उत्तर :- कानून का शासन भारतीय संविधान की एक अद्भुत विशेषता है। सामान्य तौर पर यह माना जाता है, कि कानून के शासन की धारणा को ब्रिटिश सरकार ने आरंभ किया। परंतु यह सत्य नहीं है। इतिहासकारों ने काफी कारणों से इस दावे को नकारा है, जैसे:- ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासन व्यक्तिगत एवं निरंकुश था। ब्रिटिश अधिकारी अपनी शक्तियों का प्रयोग मनमाने ढंग से करते थे तथा किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं थे। 1870 का देशद्रोह कानून ब्रिटिश कानून का भाग था। ब्रिटिश सरकार के दौरान भारतीय राष्ट्रवादियों ने कानून के शासन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय राष्ट्रवादियों ने ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों के मनमाने व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से समानता की मांग की। 19 वीं शताब्दी के अंत तक कई भारतीय कानूनी व्यवसाय में आए तथा अपने लिए कानून के शासन एवं न्याय की मांग की।

प्रश्न 3 – घरेलू हिंसा पर नया कानून किस तरह बना, महिला संगठनों ने इस प्रक्रिया में अलग – अलग तरीके से क्या भूमिका निभाई उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर :- घरेलू हिंसा एक गंभीर समस्या है। इसने महिलाओं के अधिकारों एवं सम्मान को प्रभावित किया है। महिलाओं को उनके पति, पिता, भाई और यहां तक कि बेटे द्वारा पीटा जाता है उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है। इस पर कई महिला संगठनों ने घरेलू हिंसा के विरुद्ध कानूनों की मांग की। काफ़ी प्रयासों के बाद 1999 में घरेलू हिंसा (रोक एवं सुरक्षा) विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया। 2002 विधेयक को संसद् के समक्ष प्रस्तुत किया गया। परंतु महिला संगठनों द्वारा इस विधेयक का विरोध किया गया, कि यह विधेयक घरेलू हिंसा को रोकने में प्रभावशाली नहीं था। अतः इस विधेयक को संसद की स्थाई समिति को दिया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग जैसे कई महिला संगठनों ने स्थाई समिति को कई सुझाव दिये। स्थाई समिति ने अपनी सिफारिशें संसद् को प्रस्तुत कीं। समिति की रिपोर्ट में महिला संगठनों की अधिकांश मांगों को मान लिया गया। 2005 में घरेलू हिंसा से संबंधित एक नया विधेयक संसद में पेश किया गया। यह विधेयक संसद से पास होने के तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात् कानून बन गया, तथा 2006 में यह कानून लागू हो गया।

प्रश्न 4 – अपने शब्दों में लिखिए कि इस अध्याय में आए निम्नलिखित वाक्य (पृष्ठ 44-45) से आप क्या समझते हैं : अपनी बातों को मनवाने के लिए उन्होंने संघर्ष शुरू कर दिया। यह समानता का संघर्ष था। उनके लिए कानून का मतलब ऐसे नियम नहीं थे जिनका पालन करना उनकी मजबूरी हो। वे कानून को उससे अलग ऐसी व्यवस्था के रूप में देखना चाहते थे जो न्याय के विचार पर आधारित हों।

उत्तर :- इसमें कोई संदेह नहीं है कि कानून का शासन ब्रिटिश संविधान की महत्वपूर्ण विशेषता थी। परन्तु भारत में ब्रिटिश राज के दौरान उपनिवेशी कानून के समक्ष समानता नहीं थी। 19वीं शताब्दी के अंत में भारतीय राष्ट्रवादियों ने ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों के मनमाने रवैये के विरोध में आवाज़ उठाई तथा कानून के सर्वोच्च की मांग थी। उन्होंने मांग की, कि भारत को ब्रिटिश लोगों के समान माना जाए तथा दोनों पर समान रूप से कानून लागू हो। भारतीय राष्ट्रवादियों ने न केवल समानता की मांग की, बल्कि न्याय की भी मांग की। भारतीय वकीलों ने भारतीय नागरिकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनों की मदद लेनी शुरु करदी।

कक्षा 8 नागरिक शास्त्र के सभी अध्यायों के एनसीईआरटी समाधान नीचे टेबल से देखें
अध्याय की संख्याअध्याय के नाम
अध्याय 1भारतीय संविधान
अध्याय 2धर्मनिरपेक्षता की समझ
अध्याय 3हमें संसद क्यों चाहिए?
अध्याय 4कानूनों के समझ
अध्याय 5न्यायपालिका
अध्याय 6हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली
अध्याय 7हाशियाकरण की समझ
अध्याय 8हाशियाकरण से निपटना
अध्याय 9जनसुविधाएँ
अध्याय 10कानून और सामाजिक न्याय

छात्रों को नागरिक शास्त्र कक्षा 8 के प्रश्न उत्तर प्राप्त करके काफी खुशी हुई होगी। class 8 social science in hindi में देने का उद्देश्य केवल छात्रों को बेहतर ज्ञान देना है। इसके अलावा आप हमारी वेबसाइट के एनसीईआरटी के पेज से सभी कक्षाओं के एनसीईआरटी समाधान (NCERT Solutions in hindi) और हिंदी में एनसीईआरटी की पुस्तकें (NCERT Books In Hindi) भी प्राप्त कर सकते हैं। हम आशा करते है कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा।

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