एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत पाठ 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम्

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एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत पाठ 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम्

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 4 के लिए एनसीईआरटी समाधान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की सहायता से बनाए गए है। संस्कृत भाषा की जितनी बात करें उतना ही कम होगा। संस्कृत साहित्य का इतिहास बहुत बड़ा है। संस्कृत भाषा आज भी भारत की राजभाषा है। छात्र ncert solutions for class 8 sanskrit chapter 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम् के माध्यम से परीक्षा की तैयारी अच्छे से कर सकते हैं। कक्षा आठवीं संस्कृत पाठ 4 के प्रश्न उत्तर नीचे देखें।

कक्षा : 8
विषय : संस्कृत (रुचिरा भाग 3)

चतुर्थ :- पाठ (सदैव पुरतो निधेहि चरणम्)

अभ्यास:

1 . पाठे दत्तं गीतं सस्वरं गायत।

उत्तराणि:- पाठ में दिए गए गीत का सस्वर गायन करें।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत–

(क) स्वकीयं साधनं किं भवति?

(ख) पथि के विषमाः प्रखराः?

(ग) सततं किं करणीयम्?

(घ) एतस्य गीतस्य रचयिता कः?

(ङ) सः कीदृशः कविः मन्यते?

उतराणि:-

(क) बलम्।

(ख)  पाषाणा:।

(ग) ध्येय स्मरणम्।

(घ) श्रीधर भास्कर वर्णेकर:।

(ङ) राष्ट्रवादी।

3. मञ्जूषातः क्रियापदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत–

निधेहि    विधेहि  जहीहि  देहि    भज    चल    कुरु

यथा- त्वं पुरतः चरणं निधेहि।

(क) त्वं विद्यालयं ……………..।

(ख) राष्ट्रे अनुरक्तिं ……………..।

(ग) मह्यं जलं ……………..।

(घ) मूढ! …………….. धनागमतृष्णाम्।

(ङ) …………….. गोविन्दम्।

(च) सततं ध्येयस्मरणं …………….. ।

उत्तराणि:-

(क) त्वं विद्यालयं चल।

(ख) राष्ट्रे अनुरक्तिं विधेहि

(ग) मह्‌यं जलं देहि

(घ) मूढ! जहीहि धनागमतृष्णाम्‌।

(ङ) भज गोविन्दम्‌।

(च) सततं ध्येयस्मरणं कुरु

4. (अ) उचितकथनानां समक्षम् ‘आम्’, अनुचितकथनानां समक्षं ‘न’ इति लिखत–

यथा –  पुरतः चरणं निधेहि।   आम्

(क) निजनिकेतनं गिरिशिखरे अस्ति।     

(ख) स्वकीयं बलं बाधकं भवति।  

(ग) पथि  हिंस्रा: पशवः न सन्ति।

(घ) गमनं सुकरम् अस्ति।

(ङ) सदैव अग्रे एव चलनीयम्।   

उत्तराणि:-(क) निजनिकेतनं गिरिशिखरे अस्ति आम्

(ख) स्वकीयं बलं बाधकं भवति।   न

(ग) पथि  हिंस्रा: पशवः न सन्ति।  आम्

(घ) गमनं सुकरम् अस्ति।  न

(ङ) सदैव अग्रे एव चलनीयम्।  आम्

(आ) वाक्यरचनया अर्थभेदं स्पष्टीकुरुत-

परितः         –    पुरतः

नगः          –      नागः

आरोहणम्   –   अवरोहणम्

विषमाः       –      समाः

उत्तराणि:- परितः – गृहं परितः वाटिका

पुरतः – नीरसस्तरुवरो विलसति पुरतः

नगः – हिमालयो नाम नगाधिराजः।

नागः – शेषनागासीनो भगवान् विष्णुः

आरोहणम् – पर्वतारोहणं न हि सुकरम्।

अवरोहणम् – पर्वतात् अवरोहणकाले जागरूकस्तिष्ठेत्।

विषमाः – मार्गे प्रसृताः विषमाः पाषाणाः।

समाः – अर्जुन! सुखदुःखे समे कृत्वा युद्धाय युध्यस्व।

5. मञ्जूषातः अव्ययपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-

एव    खलु    तथा    परितः  पुरतः   सदा    विना

(क) विद्यालयस्य …………….. एकम् उद्यानम् अस्ति।

(ख) सत्यम् …………….. जयते।

(ग) किं भवान् स्नानं कृतवान् …………….. ?

‌‌(घ) सः यथा चिन्तयति …………….. आचरति।

(ङ) ग्रामं …………….. वृक्षाः सन्ति।

(च) विद्यां …………….. जीवनं वृथा।

(छ) …………….. भगवन्तं भज।

उत्तराणि:-

(क) विद्यालयस्य पुरत: एकम्‌ उद्यानम्‌ अस्ति।

(ख) सत्यम्‌ एव जयते।

(ग) किं भवान्‌ स्नानं कृतवान्‌ खलु?

(घ) स: यथा चिन्तयति तथा आचरति।

(ङ) ग्रामं परित: वृक्षा: सन्ति।

(च) विद्यां विना जीवनं वृथा।

(छ) सदा भगवन्तं भज।

6. विलोमपदानि योजयत–

पुरतः         विरक्तिः

स्वकीयम्     आगमनम्

भीतिः         पृष्ठतः

अनुरक्तिः      परकीयम्

गमनम्       साहसः

उत्तराणि:-

पुरत:         पृष्ठत:

स्वकीयम्‌     परकीयम्‌

भीति:       साहस:

अनुरक्ति:     विरक्ति:

गमनम्     आगमनम्‌

7. (अ) लट्लकारपदेभ्यः लोट्-विधिलिङ्लकारपदानां निर्माणं कुरुत–

 लट्लकारे      लोट्लकारे      विधिलिङ्लकारे

यथा – पठति   पठतु        पठेत्

खेलसि     ……………      ……………

खादन्ति    ……………      ……………

पिबामि    ……………      ……………

हसतः     ……………      ……………

नयामः     ……………      ……………

उत्तराणि:- लट्लकारे     लोट्लकारे     विधिलिङ्लकारे

         खेलसि        खेल            खेले

         खादन्ति     खादन्तु          खादेयुः

         पिबामि        पिबानि      पिबेयम्

          हसतः        हसताम्      हसेताम्

         नयामः        नयाम         नयेम

(आ) अधोलिखितानि पदानि निर्देशानुसारं परिवर्तयत–

यथा –गिरिशिखर (सप्तमी-एकवचने)     –      गिरिशिखरे

पथिन् (सप्तमी-एकवचने)       –     ………………

राष्ट्र (चतुर्थी-एकवचने)           –     ………………

पाषाण (सप्तमी-एकवचने)      –     ………………

यान (द्वितीया-बहुवचने)          –     ………………

शक्ति (प्रथमा-एकवचने)        –     ………………

पशु (सप्तमी-बहुवचने)           –     ………………

उत्तराणि:-  पथिन् (सप्तमी-एकवचने)     –    पथि

 राष्ट्र (चतुर्थी-एकवचने)               –   राष्ट्राय

  पाषाण (सप्तमी-एकवचने)         –   पाषाणे

  यान (द्वितीया-बहुवचने)             –   यानानि

  शक्ति (प्रथमा-एकवचने)            –   शक्तिः

 पशु (सप्तमी-बहुवचने)              –    पशुषू

कक्षा 8 संस्कृत के सभी अध्यायों के एनसीईआरटी समाधान नीचे टेबल से देखें
पाठ की संख्यापाठ के नाम
पाठ 1सुभाषितानि
पाठ 2बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता
पाठ 3डिजीभारतम्
पाठ 4सदैव पुरतो निधेहि चरणम्
पाठ 5कण्टकेनैव कण्टकम्
पाठ 6गृहं शून्यं सुतां विना
पाठ 7भारतजनताऽहम्
पाठ 8संसारसागरस्य नायकाः
पाठ 9सप्तभगिन्यः
पाठ 10नीतिनवनीतम्
पाठ 11सावित्री बाई फुले
पाठ 12कः रक्षति कः रक्षितः
पाठ 13क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः
पाठ 14आर्यभटः
पाठ 15प्रहेलिकाः

छात्रों को संस्कृत कक्षा 8 के लिए एनसीईआरटी समाधान प्राप्त करके काफी खुशी हुई होगी। कक्षा 8 संस्कृत किताब पाठ 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम् के प्रश्न उत्तर देने का उद्देश्य केवल बेहतर ज्ञान देना है। इसके अलावा आप परीक्षा पॉइंट के एनसीईआरटी के पेज से सभी विषयों के एनसीईआरटी समाधान और हिंदी में एनसीईआरटी की पुस्तकें भी प्राप्त कर सकते हैं। 

कक्षा 8 के सभी विषयों के एनसीईआरटी समाधानयहां से देखें

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