देश प्रेम पर निबंध (Desh Prem Par Nibandh)

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Ekta Ranga

देश प्रेम पर निबंध (Desh Prem Par Nibandh)- मेरी चचेरी बहन की बेटी का बचपन मुझे हमेशा ही याद आता है। उसे बचपन से ही भारत देश से कुछ अलग ही प्रकार का लगाव था। उस समय केवल मेरी चचेरी बहन को छोड़कर हम सभी भाई-बहन विदेशी विचारधारा को मानते थे। हमें विदेशी चीजें आकर्षित करती थीं। हम सोचते थे कि जो कोई भी अमेरिका या कनाडा में पढ़ता या फिर नौकरी करता है वही सबसे सर्वश्रेष्ठ है। हमें भारत में बनीं चीजें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थीं। मेड इन चाइना जैसी वस्तुएं हमारे मन को भा जाती थीं।

देश प्रेम (Essay On Desh Prem In Hindi)

आपने अधिकतर यह देखा होगा कि चिड़िया जिस पेड़ पर अपना घोंसला तैयार कर लेती है तो वह पेड़ उसको बहुत प्यारा हो जाता है। वह चिड़िया उस पेड़ को अपनी जमीन की तरह मानने लगती है। यह बात सभी के लिए लागू होती है। हम चाहे किसी भी देश में पैदा हो हमें उस देश की धरती और मिट्टी से लगाव होना स्वाभाविक है। देश प्रेम में कितने ही देश भक्तों ने अपना सर्वस्व त्याग दिया। और ऐसे बहुत से लेखक और कवि थे जिन्होंने अपने देशभक्ति स्वरूप कलम से देश प्रेम की रचनाएं की। देश प्रेमी अपनी सफलता वतन के प्रति उज्वल स्वप्न को साकार करने में ही मानते हैं। लोगों का अपने देश के लिए प्रेम और अपना जीवन उसकी सेवा के लिए व्यतीत करना ही उस देश के भविष्य को स्वर्णिम बनाता है।

देश प्रेम पर निबंध (Desh Prem Essay In Hindi)

इस पोस्ट में हमने देश प्रेम पर निबंध (Patriotism Essay In Hindi) एकदम सरल, सहज और स्पष्ट भाषा में लिखने का प्रयास किया है। देश प्रेम पर निबंध के माध्यम से आप जान पाएंगे कि देश प्रेम क्या है, देश प्रेम का इतिहास क्या है, देश भक्ति का सही अर्थ क्या है और हमें अपने देश में किस तरह से एकुजट होकर रहना चाहिए। तो चलिए देश प्रेम पर निबंध पढ़ना शुरू करते हैं।

प्रस्तावना

“मुझे तन चाहिए, ना धन चाहिए। बस अमन से भरा यह वतन चाहिए। जब तक जिंदा रहूं इस मातृभूमि के लिए।” यह प्रसिद्ध वाक्य था शहीद भगत सिंह का। भगत सिंह ने अपना पूरा जीवन अपने देश के प्रति समर्पित कर दिया था। भगत सिंह के मन में जुनून था कि वह अपने देश को अंग्रेजी हुकूमत से छुटकारा दिलवाकर रहेंगे। सिर्फ भगत सिंह ही नहीं बल्कि राजगुरू और सुखदेव जैसे वीर सपूतों ने भी भारत के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। देश के प्रति प्रेम रखने वालों की सूची बहुत लंबी है। आखिर इन सभी देशभक्तों में ऐसा क्या था कि वह देश के लिए मर मिटने को तैयार हो गए? इसका उत्तर है देश प्रेम। देश प्रेम की भावना ने उन्हें यह साहसिक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व बनता है कि वह अपने देश के प्रति समर्पित भावना के दीपक की लौ सदैव जलाए रखे।

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देश प्रेम क्या है?

देश प्रेम और कुछ नहीं बल्कि अपने वतन के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून निरंतर एक समान बना रहने को कह सकते हैं। यह भावना अपने देश के नाम के उच्चारण मात्र से ही मन में जोश, उत्तेजना और अपार प्रेम की तरंगों का संचार कर देती है। एक सच्चा देश भक्त अपने देश की गरिमा को बनाए रखते हुए ऐसे कार्य को हजारों बार करेगा जिससे उसके देश का नाम विश्व भर में बार-बार सकारात्मक रूप से गूंज उठे। ऐसा होने से उसका मन ऐसा भाव विभोर हो उठता है मानो यह देश उसका अपनी संतान हो।

कई गीतकारों ने ऐसे गीतों की रचना की जिसमें देश भक्ति की झलक साफ-साफ दिखाई और सुनाई पड़ती है। ऐसे ही कुछ गीतों के कुछ बोल हैं- “मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती …”।, “ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम, तेरी राहों में जान तक लुटा जाऐगे, फूल क्या चीज है, तेरे कदमों पे हम, भेंट अपने सिरों की चढ़ा जाएंगे…।” देश प्रेम की भावना हमारे अंदर से उत्पन्न होती है। यह भावना सभी नागरिकों में होनी चाहिए।

देश प्रेम का इतिहास कहां से शुरू हुआ?

देश प्रेम कोई नया शब्द नहीं है। हमारे देश के लोग हमेशा से ही देश के प्रति अपनी वफादारी निभाते आए हैं। आप इतिहास में अनेकों ऐसे महान शासकों को देख सकते हैं जिन्होंने भारत को विदेशी आक्रमणकारियों को भारत पर कब्जा जमाने के सपने को पूरा नहीं होने दिया। उदाहरण के लिए सम्राट चंद्रगुप्त, सम्राट अशोक, वीर शिवाजी आदि। इन सभी महान राजाओं ने विदेशी ताकत को कभी भी भारत पर हावी नहीं होने दिया। लेकिन देश प्रेम की उच्च कोटि की भावना हमें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देखने को मिली।

देश प्रेम का प्रथम उदाहरण हमें सन् 1857 के संग्राम के दौरान देखने को मिला। मेरठ से शुरू हुए इस संग्राम से अंग्रेजी हुकूमत की जड़े हिल उठी थीं। लेकिन सन् 1920 तक आते-आते देश प्रेम की भावना अपनी चरम सीमा तक पहुंच चुकी थी। इस दौरान हमारे देश के हर कोने से हजारों की संख्या में लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। देश के प्रति इतने असीम लगाव के चलते ही आखिरकार सन् 1947 में भारत पूर्ण रूप से आजाद हो गया।

आज के दौर में देशभक्ति

माना कि हमारा देश आज एक स्वतंत्र राष्ट्र है। लेकिन आज के आधुनिक दौर में भी हम देशभक्ति को अनेक रूप में देख सकते हैं। हमने 15 अगस्त 1947 को आजादी प्राप्त की थी। इसी आजादी को हमने आज तक भी अपने दिल में कायम कर रखा है। हम आज भी बड़े ही उत्साह और जोश के साथ स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस को मनाते हैं। हर साल 15 अगस्त को स्कूल और दफ्तरों में झंडा फहराया जाता है। स्कूल और कॉलेज में परेड की जाती है। भारत में मेक इन इंडिया जैसे अभियान को बड़े ही उत्साह के साथ चलाया जाता है और लोग इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। आज के दौर में देश प्रेम को अनेकों रूपों में दिखाया जा सकता है जैसे कि देश को साफ सुथरा रखकर, भारत में बनी चीजों को खरीदकर और आपस में मिल जुलकर रहकर।

देश प्रेम पर आर. चेतनक्रांति की कविता

देशभक्त हे!

सपाट सोच, इकहरा दिमाग़, दिल पत्थर।
सैकड़ों साल से ठहरी हुई काई ऊपर।
बेरहम सोच की ख़ुदकश निगहबान से फ़रार।
तुम जो फिरते हो लिए सर पे क़दीमी तलवार।
तुमको मालूम भी है वक़्त कहाँ जाता है!
और इस वक़्त से इंसान का रिश्ता क्या है!
तुम जो पापों को दान-दक्षिणा से ढकते हो।
और भगवान् को गुल्लक बना के रखते हो।
तुम जिन्हें चीख़कर ताक़त का भरम होता है।
ज़ुल्म से अपनी हुक़ूमत का भरम होता है।
तुम जिन्हें औरतों की आह मज़ा देती है।
जिनको इंसान की तकलीफ़ हँसा देती है।
तुम जिन्हें है ही नहीं इल्म कि ग़म क्या शै है।
कशमकश दिल की, निगाहों की शरम क्या शै है।
तुम तो उठते हो और जाके टूट पड़ते हो।
सोच की आँच पे घबरा के टूट पड़ते हो।
न ठहरते हो न सुनते हो न झिझकते हो।
राम ही जाने कि क्या-क्या अनर्थ बकते हो।
यूँ कभी देश कभी धर्म कभी चाल-चलन।
असल वजह तो इस ग़ुस्से की है ये ठोस बदन।
इससे कुछ काम अब दिमाग़ को भी लेने दो।
ज़रा-सा गोश्त गमो-फ़िक्र को भी चखने दो।
जोशे-कमज़र्फ़ इस मिट्टी को नहीं भाता है।
इसको दानाँ की उदासी पे प्यार आता है।
इसने हमलावरों को लोरियों से जीत लिया।
ख़ून के वल्वलों को थपकियों से जीत लिया।
लेके लश्कर जो इसे जीतने आए बाबर।
इसका जादू कि उन्हीं से उगा दिए अकबर।
तंगनज़री से इसे पहचानना मुमकिन ही नहीं।
नफ़रतों से इसे पहचानना मुमकिन ही नहीं।
इसको जनना ही नहीं, पालना भी आता है।
सिर्फ़ भारत की माँ नहीं, ये विश्वमाता है।

देशभक्ति पर प्रसिद्ध अनमोल वचन

(1) “देश के प्रति निष्ठा सभी निष्ठाओं से पहले आती है। और यह पूर्ण निष्ठा है क्योंकि इसमें कोई प्रतीक्षा नहीं कर सकता कि बदले में उसे क्या मिलता है।” – लाल बहादुर शास्त्री

(2) “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा !” – सुभाष चन्द्र बोस

(3) “यह हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह यह अनुभव करे कि उसका देश स्वतंत्र है और उसकी स्वतंत्रता की रक्षा करना उसका कर्तव्य है। हर एक भारतीय को अब यह भूल जाना चाहिए कि वह एक राजपूत है, एक सिख या जाट है। उसे यह याद होना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसे इस देश में हर अधिकार है पर कुछ जिम्मेदारियां भी हैं।” – सरदार वल्लभभाई पटेल

(4) “किसी भी कीमत पर बल का प्रयोग ना करना काल्पनिक आदर्श है और नया आन्दोलन जो देश में शुरू हुआ है और जिसके आरम्भ की हम चेतावनी दे चुके हैं वो गुरु गोबिंद सिंह और शिवाजी, कमाल पाशा और राजा खान, वाशिंगटन और गैरीबाल्डी, लाफायेतटे और लेनिन के आदर्शों से प्रेरित है।” – भगत सिंह

(5) “धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। सन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाये देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की सेवा करना है और अगला कदम ईश्वर की सेवा करना है।” – बाल गंगाधर तिलक

(6) “आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशश्त हो सके।” – सुभाष चन्द्र बोस

देश प्रेम पर निबंध 200 शब्दों में

हमारे देश की जो धरती है वह वीरों की धरती कहलाई है। यह धरती वीरों के बलिदान की साक्षी रही है। स्वामी विवेकानंद, भगत सिंह, राजगुरु, सुभाष चंद्र बोस और ना जाने कितने ही ऐसे महान पुरूष रहे हैं जिन्होंने लोगों के दिलों में राष्ट्र प्रेम की भावना जगाई। राष्ट्र प्रेम एक अलग प्रकार की भावना है। यह कुछ इस प्रकार की भावना है जैसे हम अपनी मां के लिए प्रेम की भावना का इजहार करते हैं। राष्ट्र प्रेम की भावना हमें अपने देश के लिए कुछ बड़ा करने का हौसला देती है।

जिसे अपने देश के लिए सच्चा प्रेम होता है वह कभी भी अपने देश की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाने देता है। देश के प्रति समर्पण भाव रखना बहुत जरूरी है। जो लोग अपने देश के लिए वफादार नहीं होते हैं वह कभी भी अच्छे नागरिक की श्रेणी में नहीं आ सकते हैं। एक सच्चा देशभक्त निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करता है। सच्चा देशभक्त देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना चाहता है। आज हम सभी के लिए यह जरूरी है कि हम अपने अंदर राष्ट्रभक्ति को जागृत करके रखें। ऐसा करने से हमारा देश प्रगतिशील बनता है।

देश प्रेम पर 10 लाइनें

(1) देश प्रेम की भावना रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

(2) जैसे हम अपनी मां से प्रेम और लगाव रखते हैं ठीक उसी प्रकार की भावना हमें अपने देश के लिए भी रखनी चाहिए।

(3) सच्चे राष्ट्रभक्त कभी भी अपने देश की छवि नहीं बिगड़ने देते हैं।

(4) देशभक्त हमेशा स्वार्थहीन होकर देश की सेवा करते हैं।

(5) एक सच्चा देशभक्त कभी भी बेईमान नहीं हो सकता है।

(6) भगत सिंह, सुखदेव, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी आदि यह सभी लोग सच्चे राष्ट्रभक्त थे।

(7) हम अपनी देशभक्ति अनेकों रूप में दिखा सकते हैं।

(8) हमारे देश के जवान सच्चे राष्ट्रभक्त कहलाए जाते हैं।

(9) हमें मेक इन इंडिया मुहिम को बढ़ावा देना चाहिए।

(10) राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना हमें कहीं पर सिखाई नहीं जाती है। बल्कि यह भावना तो हमारे अंदर से ही जागृत होती है।

FAQs
प्रश्न 1. देश प्रेम क्या होता है?

उत्तर- देश प्रेम एक अलग प्रकार की भावना है जहां पर हम हर काम देश के प्रति प्रेम की भावना के साथ करते हैं। यह भावना उच्च कोटि की भावना होती है।

प्रश्न 2. देश प्रेम की भावना को कैसे प्रसार किया जाता है?

उत्तर- देश प्रेम की भावना को हम लोगों को राष्ट्र के प्रति जागरूक करके प्रसार कर सकते हैं।

प्रश्न 3. राष्ट्रप्रेम का विलोम शब्द बताइए?

उत्तर- राष्ट्रप्रेम का विलोम शब्द देशद्रोह होता है।

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